सचिन तेंदुलकर से बेहतर थे विनोद कांबली? भाई के जवाब ने साफ कर दी सारी तस्वीर, दोस्ती बेमिसाल…

सचिन तेंदुलकर से बेहतर थे विनोद कांबली? भाई के जवाब ने साफ कर दी सारी तस्वीर, दोस्ती बेमिसाल…


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विनोद कांबली के भाई वीरेंद्र ने एक इंटरव्यू में कई ऐसे सवालों के जवाब दिए हैं जो क्रिकेटप्रेमियों की दिलचस्पी का विषय रहे हैं. इनमें सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली के बीच बेहतर कौन का जवाब भी है.

सचिन तेंदुलकर से बेहतर थे विनोद कांबली? भाई के जवाब ने साफ कर दी सारी तस्वीरसचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली अपने गुरु रमाकांत अचरेकर के साथ.
नई दिल्ली. विनोद कांबली आज भले ही बदहाली के दौर से गुजर रहे हों लेकिन एक वक्त था जब वे इस देश के सितारा क्रिकेटरों में शुमार थे. 1990 के दशक में लगातार दो दोहरे शतक के बाद तो उनकी पॉपुलैरिटी सचिन तेंदुलकर को टक्कर दे रही थी. विनोद कांबली के प्रशंसक उन्हें सचिन तेंदुलकर से बेहतर बल्लेबाज बताते नहीं थकते थे. क्या सच में विनोद कांबली की बैटिंग सचिन से ज्यादा आकर्षक थी. एक इंटरव्यू में जब विनोद कांबली के भाई वीरेंद्र से यह सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘ऐसा माहौल मीडिया ने बनाया था. विनोद कांबली ने ऐसा कोई दावा कभी नहीं किया कि वे सचिन तेंदुलकर से बेहतर हैं.’

विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर की दोस्ती के किस्से क्रिकेटजगत के लिए नई बात नहीं है. ये दोनों क्रिकेटर स्कूली दिनों से ही साथ रहे हैं. साथ खेलते थे और ऐतिहासिक साझेदारी कर चर्चा में आए थे. दोनों के गुरु (रमाकांत अचरेगर) भी एक ही थे. सचिन ने 1989 में भारत के लिए डेब्यू किया तो विनोद कांबली ने 1991 में देश के लिए पहला मैच खेला. हालांकि, कांबली का करियर सचिन तेंदुलकर की तरह कामयाब नहीं रहा. विनोद कांबली 1990 के दशक में ही टीम से बाहर हो गए और बाद में विवादों में फंसकर रह गए.

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यह कहना मुश्किल है कि कौन सा विवाद कांबली के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक साबित हुआ. विनोद कांबली के भाई वीरेंद्र ने विक्की लालवानी को यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में ऐसे कई सवालों के जवाब दिए. उन्होंने सचिन और कांबली की तुलना पर कहा. ‘आप यह नहीं कह सकते कि मेरा भाई सचिन से बड़ा था या कमतर. वे दोनों समान थे. मैंने कभी अपने भाई को यह कहते नहीं सुना कि वह सचिन से बेहतर था.’

वीरेंद्र से सचिन और कांबली के बीच कथित बिगड़े संबंधों के बारे में भी पूछा गया. इस पर वीरेंद्र ने कहा, ‘नहीं, यह सच नहीं है. सचिन दादा ने हमेशा विनोद का समर्थन किया है. उनकी दोस्ती अब भी बहुत मजबूत है. सचिन कॉल करते हैं और एंड्रिया (कांबली की पत्नी) के साथ उनकी खबर लेते हैं.’

वीरेंद्र ने भी बचपन में कुछ क्रिकेट खेला और अब एक एकेडमी चलाते हैं. वीरेंद्र ने विनोद कांबली के अनुशासनहीनता के विषय पर बहुत कुछ नहीं कहा, लेकिन यह जरूर बताया कि वे खेल की चमक-धमक में बहुत ज्यादा बह गए थे. उन्होंने कहा कि वे अपने छात्रों को भी पैर जमीन पर रखने की सलाह देते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं यह संदेश दूंगा कि अगर आप क्रिकेट खेलते हैं और आपको चमक-धमक मिलती है तो भी जमीन से जुड़े रहना सीखें. जमीन से जुड़े रहें. मैंने सचिन दादा और विनोद दादा को देखकर सीखा है. अगर आप मेहनत करने के बाद सफलता प्राप्त करते हैं, तो उस सफलता को पकड़ कर रखें. जैसा हम कहते हैं, ज्यादा न बहें. बहक न जाएं.’

विजय प्रभात शुक्लाAssociate Editor

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय. अप्रैल 2020 से News18Hindi में बतौर एसोसिएट एडिटर स्पोर्ट्स की जिम्मेदारी. न्यूज18हिंदी से पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला अखबारों में पेज-1, खेल, देश-विदेश, इलेक्शन ड…और पढ़ें

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