Devotees stopped by applying barricades, corporators immersed | बेरिकेड्स लगाकर भक्तों को रोका, निगमकर्मियों ने किया विसर्जन

Devotees stopped by applying barricades, corporators immersed | बेरिकेड्स लगाकर भक्तों को रोका, निगमकर्मियों ने किया विसर्जन


बुरहानपुर7 घंटे पहले

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  • 10 दिन पूजन के बाद किया विसर्जन, प्रशासन की व्यवस्था पर आमजन ने भी किया सहयोग

शहर में एक शताब्दी बाद ऐसे हालात बने, जब गणेशोत्सव के तहत भक्तों को प्रतिमा विसर्जन के लिए घाटों पर जाने से रोक दिया गया। घाटों पर आवाजाही रोकने के लिए बेरिकेड्स लगा दिए गए। यहीं निगम कर्मचारियों ने भक्तों से भगवान गणेश की प्रतिमाएं ली और उन्हें कुंड में विसर्जित किया। आम लोगों ने भी प्रशासन की इस व्यवस्था का विरोध नहीं किया, बल्कि प्रतिमा देकर बप्पा को प्रणाम कर श्रद्धा भाव से विदा किया। बुरहानपुर जिले में वर्ष 1920 में गणेश प्रतिमा स्थापना की परंपरा शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक गणेशोत्सव का स्वरूप काफी बदला है। परंपरा अनुसार 10 दिन तक बप्पा का पूजन करने के बाद भक्त उन्हें ताप्ती नदी में विसर्जित करते आए हैं लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने सख्ती कर घाटों से नदी में विसर्जन पर रोक लगा दी। इस रोक पर हिंदू संगठनों ने विरोध कर स्वयं प्रतिमा विसर्जन करने की अपील की थी लेकिन संक्रमण की इस परिस्थिति में आम लोगों ने प्रशासन की इस व्यवस्था को स्वीकार लिया। किसी भी घाट पर विसर्जन के लिए वाद-विवाद नहीं हुआ।

नहीं निकला चल समारोह : दशकों पुरानी रात्रिकालीन चल समारोह की परंपरा टूटी
कोरोना संक्रमण के कारण इस बार दशकों पुराने रात्रिकालीन चल समारोह की परंपरा भी टूट गई। शहर में कई दशकों से रात के समय ही प्रतिमाओं का चल समारोह और मेला लगने की परंपरा रही है। रातभर अखाड़ा कलाकारों के करतब, ढोल की थाप और लेझिम की झंकार सबको बांधे रखती थी लेकिन इस बार सब कुछ सूना रहा। इस बार सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापना पर रोक लगा दी गई थी। प्रतिबंध के कारण चल समारोह भी नहीं निकल पाया।

पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम : रात 9 बजे तक चलता रहा विसर्जन, 6 तक का था समय
प्रशासन ने आमजन से सुबह 6 से शाम 6 बजे तक प्रतिमाओं का विसर्जन करने की अपील की थी लेकिन विसर्जन देरी से शुरू हुआ। शहर में आमतौर पर दोपहर 3 बजे बाद ही घाटों पर भीड़ होती है। विसर्जन तय समय से काफी देर तक चलता रहा। रात 9 बजे तक प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। ताप्ती नदी का जलस्तर बढ़ा होने के कारण यहां सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई। ताकि किसी तरह का हादसा न हो। रेणुका झील में होमगार्ड जवान बोट के साथ सुरक्षा में तैनात रहे।

घाट पर रुकने की अनुमति नहीं, इसलिए नहीं लगा जाम
हर साल गणेश विसर्जन के समय घाटों पर भीड़ होती है। ऐसे में कई घंटों तक जाम भी लगता है लेकिन इस बार घाट तक लोगों को जाने की अनुमति नहीं होने से व्यवस्थाएं बेहतर रही। आधा किमी दूरी पर ही बड़े वाहनों को रोक दिया गया। बाइक और ऑटो को घाट तक आने की अनुमति थी लेकिन जाने के लिए दूसरा रास्ता रखा गया। प्रतिमा का पूजन और निगम कर्मचारियों को देने के तुरंत बाद लोगों को घर भेज दिया गया। इस कारण किसी भी घाट पर भीड़ और जाम की स्थिति नहीं बनी।
नदी पर प्रतिमा विसर्जन के लिए 5 जगह बनाए थे कुंड
ताप्ती नदी के पुराने पुल के पास नगर निगम ने विसर्जन कुंड बनाया था। यहां सुबह से विसर्जन शुरू हो गया था। 3 बजे बाद भीड़ उमड़ी तो शाम 5 बजे तक कुंड प्रतिमाओं से पूरी तरह भर गया। विसर्जन के बाद प्रतिमाएं ऊपर तैरती नजर आई। बाद में निगम कर्मचारियों ने कुंड में अतिरिक्त प्रतिमाएं विसर्जित करने की व्यवस्था की। प्रतिमा विसर्जन के लिए राजघाट, सतियारा घाट, पुराने पुल, रेणुका झील और हतनुर पुल के पास कुंड बनाए गए थे। शहर में 16 स्थानों पर वाहन खड़े कर प्रतिमाएं भी एकत्र की गई।

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