नई दिल्ली. रविवार को भारतीय क्रिकेट के एक युग का अंत हुआ जब टेस्ट स्पेशलिस्ट चेतेश्वर पुजारा ने संन्यास की घोषणा की. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक भावुक पोस्ट के जरिए यह घोषणा की. 103 टेस्ट मैचों के अनुभवी पुजारा ने 7000 से अधिक रन और 19 शतक के साथ संन्यास लिया. पुजारा ने साल 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में आखिरी बार भारत के लिए खेला था.
चेतेश्वर पुजारा के आंकड़े उनके खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में दबदबे की कहानी बताते हैं. उनके सॉलिड डिफेंस ने सबसे ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को परेशान किया. दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 2018-19 और 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरों के दौरान कई यादगार पारियां खेलीं. 2019 में विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने 4 मैचों की सीरीज में कंगारू टीम को घर पर 2-1 से धोया था. सीरीज में धमाकेदार खेल के लिए पुजारा को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया था. दो साल बाद जब मेहमान टीम ट्रॉफी का बचाव करने के लिए आई तो फिर से पुजारा दीवार बनकर ऑस्ट्रेलियाई टीम के सामने डट गए थे.
संन्यास के बाद, पुजारा ने बताया कि उन्होंने
ऑस्ट्रेलिया के 2021 दौरे के दौरान बल्लेबाजी करते समय अपने शरीर पर लगने वाले चोटों से कैसे निपटा. पुजारा ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “ऐसे पल में बिगर पिक्चर को देखना सबसे अहम होता है. आप अपनी टीम के लिए बल्लेबाजी कर रहे हैं, अरबों लोग आपसे उम्मीद कर रहे हैं. सब प्रार्थना कर रहे हैं कि टीम अच्छा प्रदर्शन करे और सीरीज जीते. जब आपके शरीर पर चोट लगती है, तो कभी-कभी आप टूट जाते हैं, लेकिन फिर आपको शांत रहना होता है. आपको खुद पर खेल पर और अपनी क्षमता पर भरोसा करना होता है,”
आगे उन्होंने कहा, “एक या दो बार चोट लगना ठीक है, लेकिन जब बार-बार एक ही जगह पर चोट लगती है, तो दर्द असहनीय हो जाता है. ऐसे ही वक्त में आपती मेंटल स्ट्रेंथ काम आती है. यही वह समय है जब आपके देश के प्रति समर्पण और प्यार आता है. मैं भगवान में विश्वास करता हूं और वह मुझे ताकत देते हैं. मुश्किल वक्त में आपको उस आध्यात्मिक शक्ति की आवश्यकता होती है जो इंसान की समझ से परे होती है. मुझे ऐसी ताकत मिलती है जिसे मैं जिसके बारे में बता नहीं सकता लेकिन मुझे ताकत मिलती है.”
चेतेश्वर पुजारा 1,000 टेस्ट रन बनाने वाले दूसरे सबसे तेज भारतीय हैं और मार्च 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने दोहरे शतक के बाद आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में करियर की सर्वश्रेष्ठ नंबर 2 पर पहुंचे. वह टेस्ट क्रिकेट में 6,000 रन पार करने वाले 11वें भारतीय भी बने.