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Kharpatwar Hatane ke Tips: धान की फसल को खरपतवार नष्ट कर सकते हैं, ऐसे में कुछ टिप्स की मदद से आप अपनी फसल को बिना नुकसान पहुचाएं खेत से खरपतवार का निपटारा कर सकते हैं.
धान के खेत में आ रहा खरपतवार
अगर फसल में अवांछनीय पौधे यानी फसल के अलावा दूसरा पौधा भी आ जाए, जो फसल की गुणवत्ता पर असर डालता है, उसे खरपतवार कहते हैं. ऐसे में धान की खेती में भी खरपतवार आते हैं. इसमें कई तरह के खरपतवार आ रहे है. इसमें सावा, जंगली कोदो, दूब घास, मोथा, और भंगरैया जैसे खरपतवार फसल को प्रभावित कर सकते हैं. कुछ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार होते हैं, तो कुछ संकरी पत्ती वाले खरपतवार होते हैं. ये पौधे को मिलने वाले पोषक तत्व और पानी के लिए फसल से प्रतिस्पर्धा करते हैं. ऐसे में फसल की उपज पर असर पड़ सकता है.
खरपतवार से निपटने में ये विधियां है बेहतर
खरपतवार निकालने के लिए निंदाई की जा सकती है. अगर मजदूरों की उपलब्धता है, तो ये एक अच्छी विधि हो सकती है. इसके अलावा कोनोवीडर नाम के यंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं, पेट्रोल से चलने वाले पावर वीडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इनका इस्तेमाल करने से फसल को फायदा मिल सकता है. इन विधियों से टिलर्स भी ज्यादा बनते हैं, जिससे उपज ज्यादा हो सकती है.
आखिरी रास्ता है रासायनिक दवाइयां
धान की रोपाई या डीएसआर पद्धति से खेती में भी प्री-इमरजंस खरपतवारनाशियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इनका इस्तेमाल फसल की बुआई के 72 घंटे की भीतर करना चाहिए, जिससे इसका असर ठीक से हो सके. वहीं, अब धान के बुआई में 20 से 25 दिन हो गए है, तो इसमें चौड़ी और सकरी पत्ती के लिए उपलब्ध खरपतवार नाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं.