विधायक भी कीचड़ में फंसे
यहां रोजाना 5-6 शवयात्राएं मुक्तिधाम तक पहुंचती हैं. शनिवार को भी मंडलेश्वर से आई एक शवयात्रा इसी मार्ग से होकर गुजरी. भीड़ में स्थानीय विधायक राजकुमार मेव भी शामिल थे. लेकिन, कीचड़ और दलदल के बीच वे खुद अपने सफेद कपड़ों को गंदे होने से बचाते रहे. वहीं, परिजन अर्थी कंधों पर उठाकर कीचड़ में धंसते हुए निकले.
जिला मुख्यालय से 50 km दूर शनिवार को local18 की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो हालात और गंभीर दिखे. इस दौरान तीन शवयात्राएं कीचड़ से गुजरती दिखाई दीं. स्थानीय महिला रेखा पांडे बोलीं, हर साल बारिश में यही हाल होता है. पक्की सड़क और नालियां नहीं हैं. पाइपलाइन टूटी है, जिससे हर वक्त पानी रिसकर रास्ते में भरता रहता है. शिकायत करो तो सरपंच-सचिव कहते हैं, जाओ सीएम को बताओ.
40-50 साल से बदहाल हालात
रामकुंवर बाई टटवारे बताती हैं कि वह 40-50 साल से यहां रह रही हैं, लेकिन कीचड़ से मुक्ति आज तक नहीं मिली. वहीं रामकौर बाई वास्कले कहती हैं सिर्फ मुक्तिधाम मार्ग ही नहीं, पूरे इलाके में कीचड़ भरा रहता है. हमारे घर के पास घुटनों तक पानी और कीचड़ है. बदबू, मच्छर और कीड़े हर वक्त घरों में घुसते हैं. कक्षा 9वीं की छात्रा शीतल मानकर कहती हैं स्कूल जाने के लिए यूनिफॉर्म पहनकर निकलते हैं, लेकिन बाहर कदम रखते ही कपड़े गंदे हो जाते हैं. फिर वैसे ही स्कूल जाना पड़ता है.
संतोष जोशी के मुताबिक, पंचायत ने सड़क बनाई थी, लेकिन नल-जल विभाग ने पाइपलाइन डालते वक्त उसे खोद दिया और दोबारा ठीक नहीं किया. पास के ईंट भट्टों से आने वाले ट्रैक्टर भी कच्ची सड़कों को तोड़कर 2-3 फीट गहरे गड्ढे कर चुके हैं. पानी के सारे पाइप भी तोड़ दिए है. कीचड़ बनने का यही सबसे बड़ा कारण है.
500 की आबादी, रोज हादसे
राधेश्याम खांडेकर ने अपना जख्म दिखाते हुए कहा, आज ही मोटरसाइकिल से निकलते वक्त कीचड़ में गिर पड़ा, पैर पर चोट आ गई. कई बार सरपंच, सचिव, जनपद सीईओ तक शिकायत की, लेकिन सब सिर्फ आश्वासन देकर चुप हो जाते हैं. रहवासी राकेश वानखेड़े और कमल तंवर बताते हैं कि यहां लगभग 500 लोगों की आबादी है. लेकिन, अच्छी सड़क, पक्की नाली, सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं. नालियां हमें खुद साफ करनी पड़ती हैं. शवयात्राएं भी कई बार घरों के भीतर से होकर निकलती हैं.
नवलपुरा, ग्राम पंचायत लाड़वी के अंतर्गत आता है. नर्मदा किनारे बसे इस क्षेत्र में जिले का सबसे बड़ा, सर्व-सुविधा युक्त मुक्तिधाम बना है. जहां आसपास के 40 से ज्यादा गांवों से आने वाले शवों का अंतिम संस्कार होता है. लेकिन, यहां तक पहुंचने का मार्ग दलदल और कीचड़ में डूबा रहता है. रोजाना 4-5 शवयात्राएं यहां पहुंचती हैं. मुक्तिधाम से महज 20-30 कदम दूर ही यह बदहाल रास्ता लोगों को रुला देता है.
समस्याओं पर क्या बोले जिम्मेदार
जब इस मामले में पंचायत सरपंच रतन सिंह रंधावा और सचिव रमण कुशवाह से बात की गई तो उन्होंने जेसीबी से कीचड़ हटाने की बात कही. सरपंच ने क्षेत्र में नया रोड स्वीकृत होने का दावा भी किया. वहीं, विधायक राजकुमार मेव खुद अंतिम यात्रा में कीचड़ से गुजरते दिखे, लेकिन फोन पर सवाल पूछने पर बाहर होने का हवाला देकर कुछ भी कहने से बच निकले.