ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिवंगत कर्मचारी के परिवार को पेंशन और अन्य लाभ देने का आदेश देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के दिवंगत कर्मचारी देवेंद्र सिंह परमार की बर्खास्तगी को अवैध करार दिया है।
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देवेंद्र सिंह की नियुक्ति 1989 में अस्थायी रूप से हुई थी। विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी ने बाद में उनकी नियुक्ति को नियमित कर दिया। उन्होंने 28 वर्षों तक विभाग में अपनी सेवाएं दीं थी। विभाग ने 2017-18 में उन्हें दो कारणों से बर्खास्त कर दिया। पहला, उनकी नियुक्ति प्राधिकृत अधिकारी द्वारा नहीं की गई थी। दूसरा, वे हिंदी टाइपिंग की योग्यता पूरी नहीं करते थे।
कोर्ट ने दोनों पक्ष को सुनने के बाद सुनाया फैसला
2019 में परमार की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मुन्नीदेवी और अन्य वारिसों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका तर्क था कि स्क्रीनिंग कमेटी पहले ही नियुक्ति को वैध मान चुकी थी। सरकार ने भी पूर्व में इसे स्वीकार किया था। बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी अवैध थी।
कोर्ट ने राज्य शासन का पक्ष सुनने के बाद परमार की सेवाओं को 1989 से 2019 तक मान्य करने का आदेश दिया। कोर्ट ने परिवार को तीन माह के भीतर पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ देने को कहा है। समय पर भुगतान न होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।