हाई कोर्ट ने कहा-: मप्र शासन के आवेदन के तथ्य ‘शॉकिंग’ – Gwalior News

हाई कोर्ट ने कहा-:  मप्र शासन के आवेदन के तथ्य ‘शॉकिंग’ – Gwalior News



जमीन अधिग्रहण के मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अप्रसन्नता जताई। शासन की याचिका पर ग्वालियर बेंच ने कहा- अपील पेश करने में हुई देरी को माफ करने जो आवेदन किया, उसके तथ्य चौकाने (शॉकिंग) वाले हैं।

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ऐसा प्रतीत होता है कि हरसी उच्च स्तरीय नहर संभाग क्रमांक-1, डबरा के कार्यपालन यंत्री ने बार-बार ये सु​निश्चित करने का प्रयास किया कि अपील निर्धारित समय के भीतर पेश नहीं हो। ताकि पक्षकारों को इसका लाभ मिल सके।

हाई कोर्ट ने अब जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव से शपथ पत्र पर जवाब मांगा है। उन्हें बताना है कि अपील पेश करने में देरी के मामले में कार्यपालन यंत्री व अन्य गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? यदि नहीं की तो प्रमुख सचिव स्पष्टीकरण दें। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।

मामला जिला न्यायालय के 26 जुलाई 2022 को दिए आदेश के खिलाफ है। इस केस में महेंद्र, वीरेंद्र, नरेंद्र और शांति के आवेदन पर न्यायालय ने शासन को सिंचित भूमि की दर से उचित मुआवजा देने का आदेश दिया। जबकि भू- अर्जन अधिकारी ने आवेदकगण की जमीन को असिंचित माना था।

ऐसे लग गए तीन साल

  • 26 जुलाई 2022 को जमीन अधिग्रहण का फैसला हुआ।
  • 13 अगस्त 2023 को फैसले के खिलाफ अपील करने विधि- विधायी विभाग से अनुमति मिली।
  • 26 जुलाई 2022 के आदेश की प्रति लेने के 8 जुलाई 2024 को आवेदन दिया।
  • 11 जुलाई 2024 को प्रमाणित प्रति मिली।
  • 18 जून 2025 को जाकर अपील हाई कोर्ट में पेश हो सकी। इसमें एक आवेदन भी पेश किया है,जिसमें अपील पेश करने में हुई देरी को माफ करने की मांग की गई है।



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