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Omkareshwar Gomukh Ghat: ओंकारेश्वर का गोमुख घाट सिर्फ एक साधारण घाट नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कार का संगम है. जानिए क्यों यहाँ नर्मदा की जलधारा को गंगा का संगम माना जाता है और क्यों इसे नर्मदा तट की धरो…और पढ़ें
गंगा-नर्मदा संगम की मान्यता
कहा जाता है कि इस घाट पर स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है. मान्यता यह भी है कि यहां गंगा और नर्मदा का संगम होता है. इस वजह से श्रद्धालु दूर-दराज से आकर गोमुख घाट की जलधारा में स्नान, पूजा और तर्पण करते हैं. यहां की गोमुखी संरचना से लगातार पवित्र जल निकलता रहता है, जिसे दिव्य और चमत्कारिक माना जाता है.
स्थानीय संतों और महात्माओं के अनुसार, इस धारा से स्नान और तर्पण करने पर न केवल आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है. यही कारण है कि श्राद्ध पक्ष और अन्य धार्मिक अवसरों पर लोग यहां विशेष रूप से आते हैं और परंपरागत अनुष्ठान करते हैं.
त्योहारों पर उमड़ती है आस्था की भीड़
श्रावण मास, महाशिवरात्रि और नर्मदा जयंती जैसे पर्वों पर इस घाट का नजारा देखने लायक होता है. हजारों श्रद्धालु एक साथ यहां एकत्रित होकर मंत्रोच्चार, आरती और भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं. साधु-संतों के प्रवचन और नर्मदा की कल-कल करती धारा भक्तों को अध्यात्म और भक्ति के रंग में डूबो देती है.
गोमुख घाट न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक स्थल है. शांत बहती नर्मदा, चारों ओर फैली पर्वत श्रृंखला और मंदिरों की कतार इसे अद्भुत बना देते हैं. यहां बैठकर ध्यान करने वाला हर व्यक्ति भीतर से एक अलग शांति का अनुभव करता है. यही कारण है कि पर्यटक भी इस घाट को अपने यात्रा कार्यक्रम में जरूर शामिल करते हैं.
इतिहास और धरोहर का प्रतीक
ओंकारेश्वर धाम का महत्व सदियों पुराना है. लेकिन गोमुख घाट इसे और भी खास बनाता है क्योंकि यहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है. यह घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का हिस्सा है. नर्मदा तट की यह जलधारा हमें यह संदेश देती है कि आस्था, अध्यात्म और प्रकृति मिलकर जीवन को संतुलन और शांति प्रदान करते हैं.