इस मांग को लेकर महेश्वर जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया है. जिसके बाद महेश्वर को जिला बनाने की मांग ने जनांदोलन का रूप ले लिया है. इसी कड़ी में सोमवार को समिति द्वारा मंडलेश्वर से पोस्ट कार्ड अभियान की शुरुआत की. क्षेत्र के लगभग एक हजार लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पोस्ट कार्ड भेजकर महेश्वर को जिला बनाने की मांग की.
25 साल से जिले की मांग,
पुरुषोत्तम पंवार ने कहां होलकर स्टेट एवं ब्रिटिश गवर्मेंट में भी महेश्वर-मंडलेश्वर का वर्चस्व पूरे निमाड़ में था. मंडलेश्वर जिला हुआ करता था. आजादी के बाद मंडलेश्वर का खरगोन जिले में विलय हो गया. इसके बाद वर्ष 2000 के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान के शासन काल में भी जिले की मांग की गई. अब डॉ. मोहन यादव से भी मांग कर रहे है. महेश्वर जिला बनता है तो क्षेत्र के लोगों को सहूलियत होगी, क्षेत्र का विकास तेजी से होगा.
केरियाखेडी की छात्रा रंजना ने जिला बनाने की मांग करते हुए कहां वर्तमान खरगोन जिला मुख्यालय गांव से बहुत दूर पड़ता है. महेश्वर जिला बनता है तो नजदीक पड़ेगा. ग्राम ठनगांव निवासी फूलचंद वाशिंदे ने कहा महेश्वर को जिला बनाया जाना अति आवश्यक है. मंडलेश्वर ने जिला न्यायालय है. प्रशासनिक ढांचा सहित तमाम व्यवस्थाएं है. इसलिए पोस्ट कार्ड अभियान में हम भी शामिल हुए है.
जिला बना तो होगा विकास
मोहन अग्रवाल ने कहां, महेश्वर जिला बनता है तो आस पास का बड़ा क्षेत्र लाभांवित होगा. धार जिले के धामनोद, धरमपुरी वालों को भी फायदा मिलेगा. अभी उन्हें 80-90 दूर मुख्यालय पड़ता है. खरगोन के बड़वाह, बलवाड़ा के लोगों को भी खरगोन मुख्यालय लगभग 100 km पड़ता है. मंडलेश्वर शिक्षा का जब कहलाता है. पूर्व में रामेश्वर पाटीदार सांसद बने, विक्रम पटेल और डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ मंत्री बने. लेकिन रोजगार के मामले में आज भी पिछड़ा है. जिला बनने से युवाओ को रोजगार मिलेगा.
मंडलेश्वर 38 साल रहा जिला
गौरतलब है कि, महेश्वर वर्तमान में खरगोन जिले का तहसील मुख्यालय है, जबकि मंडलेश्वर एक समय पर जिला मुख्यालय रह चुका है. इतिहासकार बताते हैं कि अंग्रेजों के समय में मंडलेश्वर निमाड़ का मुख्य केंद्र था. 1868 से 1907 तक होलकर शासन में भी यह जिला मुख्यालय रहा. यही नहीं, आज भी मंडलेश्वर में जिला न्यायालय संचालित होता है.