उज्जैन से तय होता था दुनिया का समय, अद्भुत है ये ‘यंत्र महल’, यहां से चंद्र ग्रहण भी दिखेगा

उज्जैन से तय होता था दुनिया का समय, अद्भुत है ये ‘यंत्र महल’, यहां से चंद्र ग्रहण भी दिखेगा


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Chandra Grahan 2025 : महाकाल की नगरी मे खगोल विज्ञान के क्षेत्र में काफी महत्व का स्थान प्राप्त किया है, वैसे ही यहा एक 300 साल पुरानी वेधशाला है, जिसमे 7-8 सितंबर की रात को चंद्रग्रहण को यंत्र के माध्यम से देख…और पढ़ें

Ujjain News: धार्मिक नगरी उज्जैन अपनी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इन्हीं धरोहरों में एक है उज्जैन की प्राचीन वेधशाला, जिसे स्थानीय लोग ‘यंत्र-महल’ के नाम से जानते हैं. यह वेधशाला शिप्रा नदी के दक्षिणी तट पर चिंतामन रोड स्थित उन्नत भू-भाग पर बनी है. खगोल विज्ञान और ज्योतिष विद्या का यह केंद्र देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है. कभी समय निर्धारण का आधार मानी जाने वाली यह वेधशाला आज भी खगोल प्रेमियों के लिए अध्ययन और अनुसंधान का महत्वपूर्ण स्थल है.

300 साल पुराना इतिहास
वेधशाला अधीक्षक राजेंद्र गुप्त बताते हैं कि इसका निर्माण जयपुर के महाराजा जयसिंह ने वर्ष 1733 ईस्वी में करवाया था. खगोलशास्त्रियों का मानना है कि देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती है, इसलिए इसे विशेष महत्व प्राप्त है. यहां का प्रेक्षागृह भी खगोल विज्ञान की दृष्टि से अद्वितीय माना जाता है.

कब लगेगा चंद्र ग्रहण
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर रविवार की रात 9 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होगा और 8 सितंबर की रात 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा. वेधशाला में स्थापित यंत्रों की मदद से ग्रहण और अन्य खगोलीय घटनाओं का अवलोकन किया जा सकता है.

वैधशाला मे प्रमुख चार यन्त्र

1. नाड़ीवलय यंत्र ऐसा यंत्र है, जिसके दो भाग हैं. यह जमीन पर बनाया जाता है. इस यंत्र का एक भाग उत्तरी और एक दक्षिणी है. जब सूर्य उत्तरी गोलार्ध में होता है तो उत्तरी डिस्क प्रकाशित होती है और जब सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है तब इसकी दक्षिणी डिस्क प्रकाशित होती है.

2. सम्राट यंत्र 22 फीट लंबा यंत्र है. इसका झुकाव 23 डिग्री और 10 डिग्री है. इस यंत्र के मध्य में एक सीढ़ी है, जिसकी ऊपरी सतह पृथ्वी की धुरी के समानांतर होने के कारण इसमें ध्रुव तारा दिखाई देता है. सीढ़ी की दीवारों की पूर्व एवं पश्चिम दिशा को दर्शाने के लिए एक चौथाई गोलाकार भाग बनाया गया है. इस भाग में घंटा, मिनट और मिनट का तीसरा भाग रह गया है.

3. यज्ञशाला यंत्र एक गोलाकार दीवार है, जिसका व्यास 32 फीट और 10 इंच है. इस यंत्र का उपयोग किसी भी खगोलीय पिंड की ऊंचाई और अंश ज्ञात करने के लिए किया जाता है.

4. शंख यंत्र जो क्षितिज वृत्त के तल में बना है, जिसकी छाया से सात रेखाएं खींची गई हैं. 12 राशियों का प्रतिनिधित्व करता है. बता दें कि यहां बनने वाली शंकु की छाया दिन की अवधि बढ़ने या घटने के साथ घटती-बढ़ती रहती है.

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उज्जैन से तय होता था दुनिया का समय, अद्भुत है ये जगह, यहां से दिखेगा ग्रहण



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