फातिमा सना ने कहा, ‘मैने उनके भारत के कप्तान के तौर पर और आईपीएल मैच देखे हैं. वे जिस तरह मैदान पर फैसले लेते हैं, शांत रहते हैं और अपने खिलाड़ियों का समर्थन करते हैं , उससे काफी कुछ सीखने को मिलता है. जब मुझे कप्तानी मिली थी तभी मैने सोचा था कि धोनी की तरह बनना है. उनके इंटरव्यू भी देखे तो काफी कुछ सीखने को मिला.’
उन्होंने कहा, ‘इस बार यकीनन यह मिथक टूटेगा क्योंकि युवा खिलाड़ियों को पता है कि पाकिस्तान महिला क्रिकेट के लिए यह टूर्नामेंट कितना अहम है. हम अतीत के बारे में नहीं सोचेंगे. मेरा लक्ष्य टीम को सेमीफाइनल तक ले जाना है.’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान में लड़कियां अब स्कूलों में क्रिकेट खेलने लगी हैं और अंतरराष्ट्रीय मैच लाइव दिखाए जा रहे हैं. आईसीसी ने भी महिला विश्व कप के लिए पुरस्कार राशि बढ़ाकर बहुत अच्छी पहल की है जिससे पाकिस्तान जैसे देश में महिला क्रिकेट को फायदा मिलेगा. लेकिन अभी भी एक बैरियर है जो हमें इस टूर्नामेंट के जरिये तोड़ना है.’
आस्ट्रेलिया को खिताब की प्रबल दावेदार बताते हुए फातिमा ने कहा कि सेमीफाइनल की चार टीमों को लेकर कयास नहीं लगाया जा सकता लेकिन भारत का प्रदर्शन भी लगातार अच्छा रहा है. उन्होंने कहा, ‘मेरी पसंदीदा टीम आस्ट्रेलिया है. शीर्ष चार के बारे में कहना मुश्किल है लेकिन भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ अर्से में बहुत अच्छा रहा है. उनके पास जेमिमा, स्मृति और हरमनप्रीत जैसे काफी अनुभवी खिलाड़ी है लेकिन हम किसी एक खिलाड़ी पर फोकस नहीं करेंगे.’
फातिमा सना बचपन से आस्ट्रेलियाई धुरंधर एलिस पैरी की मुरीद हैं. वे एलिस पैरी और विराट कोहली के कारण आईपीएल चैम्पियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के मैच भी देखती आई हैं. उन्होंने कहा, ‘रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू मेरी पसंदीदा टीम है विराट और एलिस पैरी की वजह से. आरसीबी के आईपीएल सफर से काफी कुछ सीखने को मिला खासकर विराट का मैदान पर रवैया और फिटनेस काबिले तारीफ है.’
कराची में 11 वर्ष की उम्र में अपने भाइयों के साथ स्ट्रीट क्रिकेट खेलकर शुरूआत करने वाली फातिमा ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह एक दिन विश्व कप में कप्तानी करेंगी. उनके पिता उनके आदर्श रहे जिनका पिछले साल टी20 विश्व कप के दौरान निधन हो गया लेकिन इस दुख को भुलाकर फातिमा ने टीम के लिए खेला. उन्होंने कहा, ‘मैने जब भाइयों के साथ खेलना शुरू किया तब मुझे पता भी नहीं था कि महिला क्रिकेट टीम भी होती है. भाई के क्लब के कोच मुझे कराची में नेशनल स्टेडियम ले गए और वहीं से शुरुआत हुई. परिवार ने हर कदम पर मेरा साथ दिया.’ पिता को खोने के बावजूद टी20 विश्व कप में खेलने के फैसले के बारे में उन्होंने कहा, ‘पापा सारे मैच देख रहे थे और अचानक ही यह सब हो गया. पूरा परिवार चाहता था कि मैं पापा की इच्छा पूरी करूं और खेलूं और मैने वही किया.’ इससे पहले सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली भी अपने पिता को खोने के बाद टीम के साथ खेलने के लिए लौटे थे. क्या उन्हें इसके बारे में पता था, यह पूछने पर फातिमा ने कहा ,‘‘विराट का तो पता था, लेकिन सचिन का नहीं.’