Teacher Day: टीचर हो तो ऐसा, छुट्टी के दिन भी स्कूल जाना चाहते हैं बच्चे

Teacher Day: टीचर हो तो ऐसा, छुट्टी के दिन भी स्कूल जाना चाहते हैं बच्चे


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Teacher Day Special: खरगोन के शिक्षक राकेश शर्मा सच्चे गुरु की मिसाल है. जिले के मंगरुड की सरकारी स्कूल में उन्होंने अपनी मेहनत और पढ़ाने के अलग अंदाज से पूरी स्कूल का माहौल बदल दिया है. बच्चे इतने प्रभावित हैं कि छुट्टी के दिन भी स्कूल आकर पढ़ाई करना चाहते हैं. राकेश शर्मा बच्चों को सिर्फ किताबों से नहीं बल्कि, खेल, गीत और नृत्य के जरिए पढ़ाते है.

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से करीब 5 किलोमीटर दूर ग्राम मांगरूल बुजुर्ग की शासकीय प्राथमिक स्कूल में राकेश शर्मा बतौर शिक्षक कार्यरत हैं. उनका पढ़ाने का तरीका इतना अलग और दिलचस्प है कि बच्चे हर दिन बेसब्री से क्लास का इंतजार करते हैं. अंग्रेजी की कविता को गीतों की तरह गाते हैं, गणित के सवालों को खेल की तरह हल कराते हैं और हिंदी के शब्दों को एक्टिविटी से समझाते हैं.

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यहां के स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 90 फीसदी से ज्यादा रहती है, जो किसी सरकारी स्कूल के लिए बड़ी उपलब्धि है. स्कूल में अन्य भी शिक्षक हैं और हर कोई बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग-अलग गतिविधियों का सहारा लेता है. लेकिन राकेश शर्मा का तरीका बच्चों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है. यही वजह है कि बच्चे क्लास से कभी ऊबते नहीं

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राकेश शर्मा बताते हैं कि बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना ही उनका पहला उद्देश्य था. इसके लिए उन्होंने पढ़ाई को रोचक और मनोरंजक बना दिया. जब बच्चे सीखने के साथ हंसते-खेलते हैं तो उन्हें पढ़ाई बोझ नहीं लगती. यही कारण है कि उनकी क्लास में हर बच्चा पूरी तन्मयता के साथ भाग लेता है.

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स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को अच्छे संस्कार भी दिए जाते हैं. यहां उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका भी अलग है. जब शिक्षक नाम पुकारते हैं तो बच्चे “यस सर” कहने के बजाय खड़े होकर हाथ जोड़ते हैं और “जय श्रीराम” कहते हैं. इस परंपरा ने बच्चों में संस्कार और आत्मीयता दोनों बढ़ा दी है.

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राकेश शर्मा का मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. वे कहते हैं कि हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से बच्चों को संस्कार दे रहे हैं. जब बच्चें श्रीराम के आदर्शों को अपनाते हैं, तो उनमें अनुशासन और सच्चाई अपने आप आती है.

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बच्चों ने भी बताया कि उन्हें राकेश सर का पढ़ाने का तरीका बहुत पसंद है. बच्चे कहते है कि सर हमारे साथ बैठकर पढ़ाते हैं. कभी गीत गाते हैं, कभी नाचते हैं तो कभी दौड़ भी लगवाते हैं. इस तरह से हमें सब कुछ जल्दी समझ में आ जाता है.

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प्रार्थना सभा में बच्चे सरस्वती वंदना, गणेश स्तुति, संस्कृत के श्लोक और रामचरितमानस की चौपाइयां बोलते हैं. इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भारतीय संस्कृति को करीब से जान पाते हैं. स्कूल का पूरा माहौल आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है.

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आज इस स्कूल की पहचान बदल चुकी है. सरकारी स्कूल होने के बावजूद यहां बच्चों की सीखने की उत्सुकता और शिक्षक का समर्पण देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. शिक्षक राकेश शर्मा ने यह साबित कर दिया कि अगर गुरु सच्चे मन से पढ़ाए तो बच्चें पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि आनंद समझते हैं.

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