मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे के डीएफओ से 3 लाख रुपए मांगने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विधायक ने आरोप लगाया है कि पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने राजनीतिक साजिश के तहत लेडी अफसर को उनके खिलाफ शिकायत करने के लिए उकसाया है। डीएफओ को 3
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कांग्रेस विधायक ने इस मामले में लेडी ऑफिसर और उनके IFS पति अधर गुप्ता के खिलाफ सरकारी पत्रों को आधार बनाकर उनके खिलाफ मानहानि का दावा ठोंकने की तैयारी कर ली है। उधर, इस मामले में सरकार की 2 सदस्यीय जांच कमेटी ने काम शुरू कर दिया है।
2 सितंबर को लेडी डीएफओ नेहा श्रीवास्तव का एक लेटर सामने आया था। इसमें लेडी डीएफओ ने विधायक मुंजारे पर 3 लाख रुपए मांगने, धमकी देने और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। ये पत्र उन्होंने वन महकमे के सीनियर ऑफिसर्स को लिखा है। इस पत्र में लेडी डीएफओ ने खुद और परिवार के लिए सुरक्षा भी मांगी है।
वन विभाग से शुरू हुआ ये विवाद अब भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासी संग्राम में बदल गया है।
उधर, मुंजारे ने आरोप लगाया है कि डीएफओ नेहा अपने पति अधर गुप्ता को बचाने के लिए उन पर झूठा आरोप लगा रही हैं। इससे पहले नेहा शहडोल में पदस्थ रहते भी अपने एक सीनियर अफसर के खिलाफ झूठी शिकायत कर चुकी हैं।
दैनिक भास्कर ने इस मामले में अलग–अलग पक्षों से समझने की कोशिश की कि आखिर सच क्या है? विधायक और लेडी डीएफओ तो कैमरे पर सामने आए हैं, लेकिन आईएफएस अधर गुप्ता कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उधर, विधायक ने विधानसभा चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी रहे पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन को इस साजिश का मास्टरमाइंड बताया है। इससे विधायक और लेडी अफसर का ये विवाद अब राजनीति से भी जुड़ गया है।
गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम ने भी अनुभा पर पलटवार किया है कि एक विधायक का अफसर से पैसे मांगने के लिए धमकाने की शिकायत कोई सामान्य घटना नहीं है। इस शिकायत पर वह जवाब देने की बजाय दूसरों पर आरोप लगा रही हैं।
सबसे पहले सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम समझिए…

आरोपों पर अनुभा का पलटवार
विधायक मुंजारे ने कहा कि 27 जुलाई को सोनेवानी में मादा बाघ की मौत हुई। लेकिन बिना प्रोटोकाॅल के उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसकी सूचना तक नहीं दी। जब ये बात मेरे संज्ञान में आई तो मैंने ये बात 5 अगस्त को विधानसभा में उठाई।
छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो गई, लेकिन दक्षिण वनमंडल के डीएफओ अधर श्रीवास्तव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधर गुप्ता नेहा श्रीवास्तव के पति है। वे जब चारों तरफ से घिर गए, तो उन्होंने पत्नी का सहारा लेकर अनर्गल आरोप लगाए। नेहा श्रीवास्तव की इतनी हिम्मत नहीं कि वह जनप्रतिनिधि पर आरोप लगा दे।
यदि दोनों पति–पत्नी इतने सच्चे हैं तो मुझसे आमने–सामने बात करें। दोनों पति–पत्नी बालाघाट के जंगलों को लूट रहे हैं। मैं हाईकोर्ट में इनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूंगी।

विधायक ने आगे कहा कि नेहा श्रीवास्तव को अपनी सीमा में रहकर बात करनी चाहिए। सिविल सेवा सर्विस के दायरे में रहकर ही उन्हें आरोप लगाना चाहिए। वह जो आरोप लगा रही हैं, वो बेहद शर्मनाक और आपत्तिजनक है। वह अपने पति को बचाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही हैं।
नेहा श्रीवास्तव के पति डीएफओ अधर गुप्ता की इमेज मनमर्जी से काम करने और शराब के नशे में धूत रहने की है। ये बात शहडोल के कमिश्नर और कलेक्टर अपने पत्र में कह चुके हैं। यही इमेज उनकी बालाघाट में है।
अब समझिए आईएफएस दंपती का तर्क…
बालाघाट में नेहा श्रीवास्तव उत्तर वन मंडल सामान्य की डीएफओ हैं, जबकि अधर गुप्ता दक्षिण वन मंडल के डीएफओ हैं। दोनों 2016 बैच के अधिकारी है।
विधायक पर 3 लाख रुपए मांगने के पत्र की सच्चाई पर नेहा श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में ये माना है कि उन्होंने ही ये पत्र लिखा है। उन्होंने अपनी सारी बात इस पत्र में लिख दी है। विधायक ने उनके लिए जो अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, उसे वह दोहराना नहीं चाहतीं।
हालांकि उन्होंने ये जरूर बताया कि वह अनुभा मुंजारे के बुलाने पर रेस्टहाउस में गई थीं। जबकि वह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है।
हालांकि वह इस बात का कोई जवाब नहीं देतीं कि क्या इस पूरे एपिसोड का बाघ के शिकार और उनके पति पर लगे आरोपों से कोई कनेक्शन है?
उधर, अधर गुप्ता से शुक्रवार को हमने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया।

बालाघाट जिले के एक सीनियर अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि हां, उन्हें भी पत्र लिखे जाने की जानकारी मिली थी। वे सवाल उठाते हैं कि यदि कांग्रेस विधायक को बाघ की मौत पर कोई ऑफिशियल बातचीत करनी थी तो उन्होंने नेहा श्रीवास्तव को क्यों बुलाया?
जहां बाघ की मौत हुई, वह क्षेत्र अधर गुप्ता के कार्यक्षेत्र का है। अधिकारी एक सवाल और उठाते हैं कि यदि विधायक को बाघ की मौत पर कोई बात करनी थी तो उन्हें सीसीएफ गौरव चौधरी से बात करनी थी। सीसीएफ और विधायक के मकान भी पास ही हैं।
हालांकि हमने जब सीसीएफ से इस संबंध में जानकारी जाननी चाही तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।
विधायक अनुभा मुंजारे Vs मौसम बिसेन
विधायक मुंजारे ने आरोप लगाया है कि पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के इशारे पर उनके खिलाफ साजिश हुई है। मुंजारे यहीं नहीं रुकी, उन्होंने बिसेन की बेटी मौसम पर व्यक्तिगत आरोप लगाकर पूछा कि मौसम शादीशुदा हैं तो वह अपने नाम के साथ बिसेन क्यों लिखती हैं? अपने पति का सरनेम हरिनखेड़े क्यों नहीं लिखतीं?
इस पर मौसम बिसेन ने पलटवार किया है कि अनुभा मुंजारे मर्यादा लांघती रही हैं। चुनाव के दौरान भी व्यक्तिगत आरोप लगाती रही हैं। अब जब आईएफएस अफसर ने पैसे मांगने का आरोप लगाया है, तो उसका जवाब देने की बजाय दूसरों पर आरोप लगाने की कोशिश कर रही हैं।

बाघ का शव मिलने पर वन विभाग की टीम ने उसे जला दिया था।
अब समझिए बाघ का शव जलाने का क्या मामला है…
27 जुलाई को सोनेवानी में एक बाघ की लाश मिली। ये उसी दक्षिण वनमंडल का हिस्सा है, जहां डीएफओ अधर गुप्ता है। 29 जुलाई को वन विभाग के कर्मचारियों ने इस बाघ की लाश को जलाकर राख नदी में फेंक दी। 2 दिन बाद बाघ को जलाने की जानकारी मिली तो केस दर्ज हुआ। वन विभाग ने जांच के लिए एसआईटी बनाई। इसके बाद एसटीएसएफ ने केस दर्ज किया। अब तक 6 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन डिप्टी रेंजर और एक अन्य कर्मचारी फरार है।
अनुभा मुंजारे ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया कि डीएफओ पर एक्शन होना चाहिए।

आदिवासी विकास परिषद और कांग्रेस ने भी बालाघाट में बाघ की मौत के जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर प्रदर्शन किया है।
क्या है प्रोटोकाॅल–
मैदानी अमले के लिए ये जरुरी है कि वह डीएफओ को इसकी सूचना दें । इसके बाद फोरेंसिक सबूत जुटाए जाते हैं। इसका पंचनामा बनता है। बाघ का पोस्टमॉर्टम होता है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों का पता चलता है। अंतिम संस्कार में डीएफओ की निगरानी होती है। इसके अलावा भी काफी लंबी गाइड लाइन है जिसका पालन अनिवार्य है।