Balaghat: DFO मौके से फरार, रेंजर हो गए शिकार! बाघ हमले से किसान की मौत पर…

Balaghat: DFO मौके से फरार, रेंजर हो गए शिकार! बाघ हमले से किसान की मौत पर…


Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट के अंतिम छोर पर स्थित गांवों में बाघ का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. बालाघाट जिले के कटंगी सर्किल में 7 महीने के भीतर पांच लोग बाघ के हमले में अपनी जान गवा चुके है. वहीं, पठार अंचल के गांवों तीन गांव से तीन लोगों की मौत हो चुकी है. हाल ही में 65 साल के बुजुर्ग सेवकराम गौपाले के बाघ के हमले में इलाज के दौरान मौत हुई. ऐसे में ग्रामीणों को आक्रोश सातवें आसमान पर था. गुस्सा इतना था कि स्थानीय अधिकारियों को ग्रामीण सुनने को तैयार नहीं थे. वहीं, डीएफओ भी आए , तो वह ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठे. डीएफओ साहब से एक गलती हो गई और खामियाजा पूरे वन विभाग के महकमे को सहना पड़ा. यहां तक की भीड़ ने कटंगी वन परिक्षेत्र अधिकारी बाबूलाल चढ्ढार सहित वन विभाग के कर्मचारियों के साथ झूमाझटकी हो गई. लेकिन उससे पहले जानिए क्या है पूरा मामला…

बाघ के हमले में बुजुर्ग की मौत
बालाघाट के अंतिम छोर पर स्थित कटंगी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम आंबेझरी में 65 साल के सेवकराम गौपाले 4 सितंबर की शाम करीब चार बजे अपने खेत की ओर गए थे. वह अपने खेत में काम ही कर रहे थे कि अचानक उनका सामना बाघ से हुआ. उनके बैल तो भागकर घर आ गए लेकिन वह बाघ से लड़ते रहे. इसमें उन्होंने जीत हासिल की और खुद चलते हुए अपने घर पहुंचे. लेकिन बाघ ने उन्हें पूरे तरह जख्मी कर दिया था. ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों ने ही निजी वाहन से घायल सेवकराम को कटंगी के अस्पताल लाया गया. लेकिन वहां पर प्राथमिक उपचार दिया गया और जिला अस्पताल रेफर किया गया. लेकिन बाघ ने उनके गर्दन और गाल को बुरी तरह नोच लिया और रात करीब 11 बजे उनकी मौत हो गई. इसके बाद ग्रामीणों में गुस्सा और बढ़ गया और पांच सितंबर को स्थिति और भी बिगड़ गई.

करीब एक सवा एक बजे पहुंचे डीएफओ
सुबह से ही वन विभाग अमला मौके पर पहुंच चुका था. वहीं, एसडीएम केसी ठाकुर भी मौके पर थे. इस दौरान वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. ऐसे में ग्रामीण वहीं, करीब 1 बजकर 10 मिनट पर डीएफओ अधर गुप्ता ग्राम आंबेझरी पहुंचे. ऐसे में वह ग्रामीण सड़क पर बैठ गए. वहीं, डीएफओ भी ग्रामीणों के साथ बैठे गए. वहीं, फिर धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और ग्रामीणों ने अधर गुप्ता को अपनी समस्या बताई और इसके बाद ग्रामीण भी लगभग शांत हो गए थे. इसके बाद करीब दो किलोमीटर पैदल चल कर घटनास्थल पर गए. वहीं, से वाहन पर बैठ कर डीएफओ साहब दूसरे रास्ते से कन्हड़गांव होते हुए रवाना हुए. इसी के बाद से गुस्साए ग्रामीणों का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा, जिसका खामियाजा वन विभाग के कर्मचारियों को सहना पड़ा.

तो इसलिए हुई विवाद की स्थिति
वन विभाग डीएफओ अधर गुप्ता दूसरे रास्ते से रवाना हो गए. इसके बाद किसी ग्रामीण ने उनके जाने की जानकारी दी. डीएफओ को रोकने वाले अक्षय सोनवाने का आरोप है कि कैनल की तरफ गए, जहां से भाग रहे थे. ऐसे में अक्षय ने डीएफओ साहब को गांव की तरफ आने के लिए कहां. लेकिन डीएफओ के ड्राइवर ने अक्षय को धक्का दिया. वहीं, अर्जुन मुंगुसमारे ने लोकल 18 बताया कि डीएफओ के ड्राइवर ने जिंदा जलाने की धमकी दी. वहीं, उन्होंने डीएफओ पर आरोप लगाया कि उन्होंने भी ऐसी ही धमकी दी और वीडियो बनाने की बात कहीं.

डीएफओ मौके से फरार, रेंजर बने शिकार
डीएफओ तो दूसरे रास्ते से निकल गए लेकिन रेंजर साहब सहित वन विभाग के कर्मचारियों को छोड़ गए. ऐसे में ग्रामीणों का सारा गुस्सा मौके पर स्थित रेंजर पर फूट पड़ा. वहीं, ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों के साथ झूमाझटकी भी की. ऐसे में स्थिति और गंभीर हो गई. वहीं, पुलिस भी बीच बचाव करने उतरी. ग्रामीणों का कहना है कि अगर डीएफओ साहब दूसरे रास्ते से भागते नहीं, तो ऐसा होता नहीं.

ग्रामीणों की ये थी मांगे
बाघ के हमले में सेवकराम के मौत के बाद ग्रामीणों का कहना था कि 8 लाख के बदले 25 लाख रुपए का मुआवजा मिलना चाहिए. इसकी घोषणा सत्ताधारी पार्टी ने भी की थी. वहीं, शहडोल में हाथी के हमले से शख्स की मौत हुई थी, तब भी पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की राशि मिली थी. दूसरी मांग ये थी कि वन विभाग लापरवाही न बरते और वह बेखौफ होकर खेती में काम कर सके. ग्रामीणों का कहना था कि दोबारा ऐसी घटना न हो इसकी गारंटी दी जाए.

बातचीत में डीएफओ ने दिए ये आश्वासन
विवाद से पहले हुई बातचीत के दौरान डीएफओ अधर गुप्ता ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि हफ्ते भर तक यहां वन विभाग का अमला रहेगा. वहीं, एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाएगा. इस कमेटी से मानव और वन्य प्राणियों के बढ़ते तनाव के मूल कारणों को समझने की कोशिश की जाएगी. वहीं, खेतों के पास सोलर वाली झटका मशीन वाली फेंसिंग की जाएगी, जिससे खेतों में वन्य प्राणी नहीं आ सकेंगे.

ग्रामीणों के रोजी-रोटी का संकट
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस तरह से लोग मारे जाएंगे तो खेत में डर बना रहेगा. वहीं, वन विभाग का कहना है हफ्ते भर खेत न जाए. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक दिन खेत न जाओ तो फसल पर असर पड़ सकता है. ऐसे में ग्रामीण खेत नहीं जाएंगे, तो उनके साथ रोजी रोटी का संकट बना रहेगा. 5 सितंबर को पूरा दिन विवाद चला लेकिन समाधान नहीं निकल सका.

7 महीने में पांच लोगों की मौत दो घायल
वन परिक्षेत्र कटंगी में बीते 7 महीने में पांच लोग बाघ के हमले में मारे गए है. वहीं, हाल ही में आम्बेझरी और कन्हड़गांव के दो शख्स घायल भी हुए है. बाघ के हमले मामले 24 दिसंबर 2024 से शुरु हुआ है, जब खैरंलांजी गांव में एक शख्स को बाघ ने अपना निवाला बनाया था. उसके बाद कुड़वा, वन ग्राम कछार, सिरपुर और अब आंबेझरी में बाघ के शख्स की मौत हुई है.

पठार क्षेत्र के दर्जन भर गांंवों में खौफ का माहौल
बालाघाट के अंतिम छोर पर स्थित करीब दर्जन भर गांवों में खौफ का माहौल बना हुआ है. इसमें कूड़वा गांव ही नहीं, आसपास के लगभग दर्जन भर गांव इस समय बाघ की दहशत से जूझ रहे हैं. गोरेघाट, देवरी, चिटका देवरी, आंबेझरी, कन्हड़गांव, भोंडकी, बड़पानी, हमेशा, मासुलखापा और खैरलांजी जैसे गांवों में भी लोग झुंड में निकल रहे हैं. खैरलांजी में तो स्थिति यह है कि कोई भी अकेला जंगल या खेत की ओर जाने की हिम्मत नहीं करता है. आए दिन लोगों का सामना बाघ से होता है. ऐसे में डर-डर कर वह अपने खेतों की ओर जाते हैं.



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