भिंड में रविवार दोपहर 12 बजे से जैसे ही चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू हुआ, पूरे जिले का धार्मिक माहौल बदल गया। मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और पूजा-अर्चना का सिलसिला थम गया। श्रद्धालुओं ने परंपरा और मान्यताओं के अनुरूप अपने घरों व मंदिरों में आराधना रो
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दंदरौआ धाम से कालेश्वर तक पसरा सन्नाटा भिंड जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों दंदरौआ धाम हनुमान मंदिर, साक्षी सरकार हनुमान मंदिर, भिंड शहर के प्राचीन बलखंडेश्वर महादेव और कालेश्वर महादेव मंदिर जहां सामान्य दिनों में भक्तों की भीड़ रहती है, वहां सूतक लगते ही सन्नाटा छा गया।
हालांकि सुबह श्रद्धालुओं ने जल्दी उठकर स्नान-ध्यान कर लिया और पितृपक्ष के पहले दिन श्राद्ध, तर्पण व पूजा-अर्चना पूरी कर ली।
मंदिरों के पट बद रहे।
पितृपक्ष की शुरुआत पर ग्रहण का असर रविवार से पितृपक्ष का आरंभ भी हुआ है। परंपरा के अनुसार, पितरों को तर्पण और ब्राह्मण भोज सूतक लगने से पहले ही पूरे किए गए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सूतक काल में पूजा-पाठ करना वर्जित है, क्योंकि इससे राहु बलवान होता है। इसी कारण दोपहर बाद से धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए गए और मंदिरों के पट बंद रखे गए।
पंडितों के अनुसार, रात में चंद्र ग्रहण के मोक्ष काल के बाद ही मंदिरों के पट खोले जाएंगे। इसके उपरांत मंदिरों और घरों में गंगाजल से शुद्धिकरण कर पुनः पूजा-अर्चना शुरू होगी। इस दौरान भजन-कीर्तन का क्रम जारी रहेगा, लेकिन भोजन ग्रहण करना वर्जित माना गया है। केवल बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को अपवाद स्वरूप छूट दी गई है।