जमीन पर क्रिकेट खेलना, स्टे ऑर्डर का उल्लंघन नहीं: गुना में जमीनी विवाद के बाद हाईकोर्ट में लगी थी अवमानना याचिका; खारिज हुई – Guna News

जमीन पर क्रिकेट खेलना, स्टे ऑर्डर का उल्लंघन नहीं:  गुना में जमीनी विवाद के बाद हाईकोर्ट में लगी थी अवमानना याचिका; खारिज हुई – Guna News



ग्वालियर हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका निरस्त कर दी है।

गुना जिले के पेंची गांव की एक विवादित जमीन को लेकर चल रहे मुकदमे में ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन का अस्थायी और निष्क्रिय उपयोग जैसे कि युवाओं का क्रिकेट खेलने, जेसी स्थिति आदेश का उल्लंघन नहीं मान

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यह याचिका राधेश्याम नटानी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि राजेंद्र कुमार जैन ने कोर्ट के स्टे आदेश की अवहेलना करते हुए विवादित जमीन को गांव के युवाओं को खेलने के लिए दे दिया और वहां जेसीबी व ट्रैक्टर से समतलीकरण भी कराया गया।

जमीन को लेकर वर्षों से चला आ रहा है विवाद

यह विवाद चांचौड़ा क्षेत्र के ग्राम पेंची की जमीन को लेकर है, जिसे राधेश्याम नटानी अपनी बताकर दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास पंजीकृत विक्रय पत्र है और वह वैध मालिक हैं। वहीं राजेंद्र कुमार जैन का दावा है कि यह उनकी संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति है और उन्हें इस पर जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त है।

अदालत में दी गई यह दलीलें

राधेश्याम नटानी ने याचिका में आरोप लगाया कि राजेंद्र जैन ने कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का उल्लंघन करते हुए जमीन को खेल मैदान के रूप में उपयोग करने के लिए दे दिया, जबकि मामला अभी विचाराधीन है।

दूसरी ओर, राजेंद्र कुमार जैन की ओर से वकील नवल किशोर चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने जो यथास्थिति आदेश दिया है, वह उनके शांतिपूर्ण कब्जे को बनाए रखने के लिए था, और जमीन पर बच्चों द्वारा खेलना या अस्थायी रूप से उपयोग किया जाना किसी भी प्रकार से संपत्ति के स्वरूप में स्थायी परिवर्तन नहीं करता।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस जमीन पर किसी तीसरे पक्ष का कानूनी अधिकार नहीं बनाया गया है और न ही कोई निर्माण कार्य कराया गया है। इसलिए अवमानना की कार्रवाई करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने कहा- अटकलों के आधार पर किसी को सजा नहीं दे सकते

ग्वालियर हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अवमानना की कार्रवाई दंडात्मक प्रकृति की होती है और केवल अटकलों के आधार पर किसी व्यक्ति को सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक संपत्ति की स्थिति में स्थायी बदलाव नहीं किया गया हो, तब तक केवल खेलकूद जैसी गतिविधियां यथास्थिति आदेश का उल्लंघन नहीं मानी जा सकतीं। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने राधेश्याम नटानी द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका को खारिज कर दिया।



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