अगर सुबह उठते ही आधे घंटे तक जोड़ों में जकड़न रहती है तो यह गठिया का शुरुआती संकेत हो सकता है। रुमेटोलॉजिस्ट डॉ. अरुण तिवारी ने गठिया जागरूकता माह (सितंबर) के तहत आयोजित पेशेंट अवेयरनेस कैंपेन में कहा कि गठिया लाइलाज नहीं है। लेकिन, यह ब्लड प्रेशर और
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डॉ. तिवारी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी ही नहीं होती कि गठिया के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक यानी रुमेटोलॉजिस्ट मौजूद हैं। ज्यादातर मरीज ऑर्थोपेडिक या अन्य डॉक्टरों से इलाज करवाते रहते हैं और राहत न मिलने पर मान लेते हैं कि गठिया का कोई इलाज नहीं।
मुख्य रूप से गठिया के दो प्रकार हैं गठिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। एक आस्टियोआर्थराइटिस यानी बढ़ती उम्र और जोड़ों के घिसाव से होने वाला रोग। जबकि ऑटोइम्यून में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही जोड़ों पर हमला करती है। इसमें रुमेटोइड आर्थराइटिस, एंकीलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस, लुपस और सोरायसिस संबंधी गठिया प्रमुख हैं।
पुरुषों और महिलाओं में अलग लक्षण महिलाओं में गठिया आमतौर पर कलाई और हाथ के छोटे जोड़ों से शुरू होता है, जबकि पुरुषों में यह रीढ़ और कमर के हिस्सों को प्रभावित करता है। सुबह की जकड़न और दर्द इसके शुरुआती संकेत हैं। सही उपचार न मिले तो लंबे समय में जोड़ों में टेढ़ापन तक आ सकता है।
गठिया के सामान्य लक्षण
- जोड़ों में दर्द और सूजन
- सुबह आधे घंटे तक अकड़न
- लालिमा और गर्माहट
- थकान और कमजोरी
- मुंह में छाले, धूप से एलर्जी
- हड्डियों में बुखार और जोड़ों का टेढ़ापन
यह केवल वृद्धावस्था का रोग नहीं डॉ. तिवारी ने कहा कि गठिया को लेकर कई भ्रांतियां हैं। जैसे यह केवल वृद्धावस्था का रोग है, दवाओं से किडनी खराब हो जाती है या स्टेरोइड्स हमेशा नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठिया किसी भी उम्र में हो सकता है और विशेषज्ञ की देखरेख में दी गई दवाएं किडनी को नुकसान नहीं पहुंचातीं। वहीं, थोड़े समय तक स्टेरोइड्स का प्रयोग सुरक्षित है।
जीवन में यह सुधार हैं जरूरी
- पौष्टिक संतुलित आहार लें
- धूम्रपान और तंबाकू से बचें, शराब सीमित करें
- रोजाना 20 मिनट व्यायाम और योग करें
- पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें
- वजन नियंत्रित रखें, खासकर आस्टियोआर्थराइटिस रोगी
- दवाएं कभी अचानक बंद न करें, केवल विशेषज्ञ की सलाह से ही लें