पूर्व सीएम सिंह ने लिखा प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पत्र।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सागर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के हालिया घटनाक्रमों का जिक्र किया है। दिग्विजय ने लिखा कि जनसुनवाई योजना गरीब और वंचित वर्ग को न्याय दिल
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दिग्विजय सिंह ने कहा कि सरकार ने योजना का व्यापक प्रचार किया और विज्ञापनों पर जनता का पैसा खर्च किया। लेकिन अफसरों की संवेदनहीनता के कारण आम लोगों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा, “अगर अधिकारी संवेदनशील होते और समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सक्रिय रहते तो यह योजना सराहनीय साबित होती।”
सागर जनसुनवाई में हुए घटनाक्रम का जिक्र
पत्र में दिग्विजय ने 9 सितंबर की सागर जनसुनवाई की घटनाओं का उल्लेख किया।
खजरा गांव के दिव्यांग अर्जुन सिंह लोधी को प्रमाण पत्र न मिलने पर मजबूरी में सड़क पर लेटना पड़ा।
बरोदिया कलां के सुरेश कुशवाह प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी समस्या के निराकरण के लिए अफसरों को खुश करने फूलमाला लेकर पहुंचे।
सुआतला गांव के किसान हेमराज पटेल फसल मुआवजा न मिलने पर फूट-फूटकर रोए।
उन्होंने लिखा कि इन सबके बावजूद अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
आत्महत्या के प्रयासों का हवाला
दिग्विजय सिंह ने पत्र में सागर कलेक्टोरेट परिसर की पुरानी घटनाओं का भी हवाला दिया।
8 माह पहले एक महिला ने अवैध कब्जा हटाने की मांग को लेकर फांसी लगाने की कोशिश की।
अगस्त 2025 में एक महिला ने सुनवाई न होने पर स्वयं पर केरोसिन छिड़ककर आत्महत्या का प्रयास किया।
अभयराज नामक व्यक्ति ने भी कलेक्टर कार्यालय के सामने जान देने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि ये घटनाएं दिखाती हैं कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता नहीं है।
“जनसुनवाई योजना मजाक बन गई है”
दिग्विजय ने कहा, “यह साफ है कि सरकार ने संवेदनशीलता खो दी है और अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। जनसुनवाई योजना अब मजाक बनकर रह गई है।”
मुख्यमंत्री से किया अनुरोध
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, “मेरा आपसे अनुरोध है कि या तो इस योजना को बंद कर दें, या इसे सार्थक बनाने के लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता बरतने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दें। ताकि आम जनता को सड़क पर लेटने या आत्महत्या जैसे कदम उठाने की नौबत न आए।”