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Agriculture News: डॉ कमलेश ने लोकल 18 से कहा कि सोयाबीन की जेएस 2069, जेएस 2034 आरवीएसएम 2011-35 जैसी किस्में पीला मोजेक रोग के प्रति सहनशील पाई गई हैं, यानी कि सोयाबीन की इन किस्मों में इस रोग का कोई खतरा नहीं है.
डॉ कमलेश ने कहा कि जिन किसान भाइयों ने सोयाबीन की जेएस 2069, जेएस 2034 आरवीएसएम 2011-35 जैसी किस्में लगा रखी हैं, ऐसी किस्में पीला मोजेक रोग के प्रति सहनशील पाई गई हैं. इसका मतलब है कि सोयाबीन की इन किस्मों में इस रोग का कोई खतरा नहीं है. सोयाबीन की फसल को सफेद मक्खी से बचाने के लिए एक हेक्टेयर में 100 ग्राम थाया मेथॉक्साम 25 डब्ल्यूजी या 300 मिली इमिडा क्लोप्रिड 17.8 एसएल को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.
अगर रोग ने फसलों को ज्यादा जकड़ रखा है, तो…
उन्होंने आगे कहा कि अगर रोग ने फसलों को ज्यादा जकड़ रखा है, तो किसान भाई एक हेक्टेयर में 100 ग्राम एसिटा मिप्रिड 20 या 150 ग्राम डाइनोटेफ्यूरान 20 एसजी का छिड़काव करें. इसके साथ ही रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट करें ताकि संक्रमण न फैले. कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, अगर किसान भाई समय से इन उपायों को अपना लेते हैं, तो सोयाबीन फसल को पीला मोजेक रोग से बचाकर अपनी फसल का उत्पादन बढ़ा सकते हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.