भूमि आंवला की खेती कैसे करें? खूब होगा मुनाफा, किसान नोट कर लें ये जरूरी बातें

भूमि आंवला की खेती कैसे करें? खूब होगा मुनाफा, किसान नोट कर लें ये जरूरी बातें


Amla Farming: कृषि क्षेत्र में आजकल किसान पारंपरिक फसलें जैसे गेहूं, चना, सोयाबीन, आलू आदि की खेती करते हैं. क्या आप जानते हैं कि औषधीय फसलें भी बेहद लाभकारी हो सकती हैं? ऐसे ही एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल का नाम है भूमि आंवला (Phyllanthus emblica). यह खासकर उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो कम लागत में खेती कर अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं. भूमि आंवला को हिंदी में आंवला भी कहा जाता है. इसकी खेती ज्यादा नहीं की जाती है, लेकिन बाजार में इसकी मांग बढ़ती ही जा रही है. बड़ी दवाई कंपनियां और बड़े शहरों के व्यापारी इस आंवला को औषधीय उपयोग के लिए भारी मात्रा में खरीदते हैं. वर्तमान में इसकी कीमत 60 से 70 रुपए प्रति किलो तक बिकती है, जिससे किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.

भूमि आंवला की खेती के फायदे

औषधीय महत्व
भूमि आंवला में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और औषधीय गुण पाए जाते हैं. यह सर्दी-जुकाम, पाचन संबंधी समस्याओं, त्वचा रोग, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई बीमारियों में लाभकारी होता है. आंवला से आयुर्वेदिक दवाएं, हर्बल शर्बत, चूर्ण और आयुर्वेदिक टॉनिक भी बनाए जाते हैं.

कम निवेश, अधिक लाभ
भूमि आंवला की खेती में अत्यधिक तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है. इसकी देखभाल में समय व प्रयास कम लगता है. साथ ही, यह फसल कम पानी में भी अच्छी तरह उग जाती है. इससे छोटे व सीमित संसाधनों वाले किसान भी आसानी से लाभ कमा सकते हैं.

बाजार में अच्छा दाम
जैसे-जैसे आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे आंवला का दाम भी बढ़ रहा है. औषधीय कंपनियां और स्थानीय व्यापारी इसे 60 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदते हैं. अगर किसान उचित समय पर अपनी फसल बेचते हैं, तो उन्हें सालाना लाखों रुपए का मुनाफा हो सकता है.

भूमि आंवला की खेती का तरीका

भूमि का चयन
आंवला की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उत्तम मानी जाती है. जमीन में कार्बनिक पदार्थ मिलाकर इसे उपजाऊ बनाया जाता है. आंवला अधिकतर खेतों में रोपण के माध्यम से उगाया जाता है.

रोपण का समय
भूमि आंवला के पौधे लगाने का सही समय जुलाई से अक्टूबर तक होता है. यह अवधि मानसून के चलते पौधों को सही समय पर उगने में मदद करती है. रोपण के दौरान पौधों की दूरी 2.5 से 3 मीटर के बीच रखनी चाहिए, ताकि उनकी जड़े और शाखाएं भरपूर फैल सकें.

सिंचाई और पोषण
भूमि आंवला की फसल को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है. शुरुआती दिनों में हल्की सिंचाई की जा सकती है, लेकिन पौधा बढ़ने के बाद वर्षा पर ही निर्भर किया जा सकता है. साथ ही, कार्बनिक खाद और जैविक उर्वरक का प्रयोग कर पौधों की सेहत बढ़ाई जाती है.

रोग और कीट नियंत्रण
इस फसल पर रोग और कीट कम होते हैं. फिर भी, समय-समय पर नीम की पट्टी से छिड़काव करना फायदेमंद रहता है. इससे पौधों को फंगल इंफेक्शन और कीटों से बचाया जा सकता है.

फसल कटाई कब करें
आंवला का पेड़ लगने के बाद तीसरे या चौथे वर्ष से फल देना शुरू करता है. फसल की कटाई का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है. फलों को सावधानीपूर्वक तोड़ा जाता है ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे. एक एकड़ में लगभग 1000 किलो फल उपज संभव है, जिससे अच्छा लाभ होता है.

उपसंहार
भूमि आंवला की खेती न केवल आयुर्वेदिक महत्व से भरपूर है, बल्कि यह किसानों के लिए आय का स्थायी स्रोत भी बन रही है. जहां आम फसलों की कीमतें बाजार में कम होती जा रही हैं. वहीं, भूमि आंवला का मूल्य लगातार बढ़ रहा है. अगर किसान इस पर ध्यान दें, सही तरीके से खेती करें और समय पर बिक्री करें, तो वे लाखों रुपयों तक का लाभ कमा सकते हैं.



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