नौकरी छोड़कर खोला इडली-डोसा का स्टॉल, सतना का यह शख्स आज कमाता है लाखों!

नौकरी छोड़कर खोला इडली-डोसा का स्टॉल, सतना का यह शख्स आज कमाता है लाखों!


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MP News: सतना में साउथ इंडियन फूड का स्वाद परोसने वाला बीकॉम इडली वाला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. खास बात यह है कि इस छोटे से स्टॉल पर न सिर्फ शहर के युवा और परिवार आते हैं, बल्कि बाहर से आए यात्री भी यहां रुककर डोसा-इडली का स्वाद चखते हैं. बढ़ती लोकप्रियता ने इसे सतना का नया फूड स्पॉट बना दिया है.

सतना: सतना शहर की गलियों में एक छोटे से ठेले ने इन दिनों बड़ी पहचान बना ली है. लोग यहां सिर्फ इडली और डोसा खाने नहीं आते बल्कि उस जज़्बे को महसूस करने भी आते हैं, जिसने नौकरी छोड़कर एक साधारण युवक को इडली डोसा किंग बना दिया. बीकॉम डिग्री होल्डर सुमित ताम्रकार का यह अनोखा सफर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.

सुमित ताम्रकार ने एमकॉम तक की पढ़ाई सतना पीजी कॉलेज से पूरी की और करीब दस साल तक अलग-अलग नौकरियों में समय बिताया. सुपरमार्केट में बतौर मैनेजर, इलेक्ट्रॉनिक शॉप और फिर जोमैटो तक का अनुभव उन्होंने हासिल किया. लेकिन उनके मन में हमेशा यह सवाल रहा कि क्या नौकरी से बेहतर विकल्प नहीं हो सकता? इसी सोच ने उन्हें अपने चाचा के व्यवसाय से प्रेरित किया, जिनका दिल्ली में भी यूनिक नाम से छोटा बिज़नेस चलता है. उसी से सीख लेकर सुमित ने भी अपनी डिग्री को ब्रांड बना दिया और शुरू कर दिया बीकॉम इडली वाला नाम से खुद का व्यवसाय.

 छोटा स्टॉल, बड़ा स्वाद

सुमित का यह ठेला सुबह 9 बजे से रात 7-8 बजे तक ग्राहकों से भरा रहता है. यहाँ 25 रुपये की साधारण इडली से लेकर 35 रुपये की फ्राई इडली, 30 रुपये का सांभर वड़ा, डोसा और मूंग का चिल्ला तक मिलते हैं. दिनभर में 250 से 300 प्लेट बिक जाती हैं जिससे मोटे तौर पर 3000 से 3500 रुपये की कमाई होती है. इस तरह महीने का टर्नओवर लाखों तक पहुँच जाता है.

ग्राहकों का विश्वास और जुड़ाव

स्टूडेंट्स, कर्मचारी, यात्री और राहगीर तक हर वर्ग का ग्राहक यहाँ दिखाई देता है. यहाँ के रेगुलर कस्टमर रौनक पांडे कहते हैं कि उन्हें यहाँ का स्वाद बिल्कुल साउथ इंडियन फील कराता है. वहीं लकी सिंह बघेल बताते हैं कि स्वाद के साथ मिलने वाला व्यवहार और सर्विस उन्हें रोज़ खींच लाता है. उनके मुताबिक जिस दिन से यह स्टॉल खुला है तभी से यह उनकी पहली पसंद बन गया है.

युवाओं के लिए प्रेरणा

बीकॉम इडली वाला सिर्फ एक स्टॉल नहीं बल्कि इस बात का प्रमाण है कि मेहनत और जुनून से किसी भी छोटे काम को बड़ा बनाया जा सकता है. सुमित की कहानी यह संदेश देती है कि डिग्री हासिल करने के बाद भी अगर नौकरी संतुष्टि न दे तो उद्यमिता से रास्ते खोले जा सकते हैं. आज उनका नाम न सिर्फ उनके स्वाद से बल्कि उनके हौसले से भी शहर में गूंज रहा है.

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