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White Owl: आमतौर पर हिमालय में मिलने वाला दुर्लभ सफेद उल्लू सागर में कैसे पहुंचा, लोग हैरान हैं. यह उल्लू जब मिला तब उसके पंख चिपकाए गए थे और…
किसी ने चिपका दिया था पंख
कुछ समय पहले सागर के शास्त्री नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में ऐसा ही एक सफेद उल्लू मिला था. उसकी हालत खराब थी, क्योंकि किसी ने उसके दोनों पंख गोंद और टेप से चिपका दिए थे, जिससे वह उड़ान नहीं भर पा रहा था. स्कूल के शिक्षक ने पक्षी प्रेमी और रेस्क्यूअर शैलेंद्र जैन को बुलाया. जैन ने बताया कि उन्होंने दो दिनों तक उसके पंख साफ किए. पानी, साबुन और शैंपू से जब काम नहीं बना तो उन्हें केरोसिन का सहारा लेना पड़ा. पंख ठीक होने पर तीसरे दिन उसे जंगल में छोड़ दिया गया.
शैलेंद्र जैन के अनुसार, सफेद उल्लू बेहद दुर्लभ है. इस पर तांत्रिकों की नजर हमेशा रहती है. दिवाली के समय इन पर खतरा और बढ़ जाता है. क्योंकि, अंधविश्वास में लोग इनके पंख, चोंच और नाखून तक तंत्र क्रियाओं में इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि कई लोग इन्हें पकड़कर बलि दे देते हैं या फिर अवैध तरीके से बेचने की कोशिश करते हैं. उनका कहना है कि संभवतः इस उल्लू को भी किसी ने पकड़कर घर में रखने का प्रयास किया होगा, लेकिन वह छूटकर स्कूल परिसर तक आ पहुंचा.
हिमालय पर मिलता है, सागर में कैसे आया?
वहीं, जूलॉजी एक्सपर्ट डॉ. मनीष जैन का कहना है कि यह सफेद उल्लू बुंदेलखंड और मध्यप्रदेश की जलवायु में सामान्यतः नहीं पाया जाता. यह हिमालयी उल्लू की प्रजाति है, जिसे हिमालयी वुड उल्लू भी कहा जाता है. यह प्रजाति एशिया के वनों में पाई जाती है और इसका विस्तार हिमालय से लेकर कोरिया और ताइवान तक है. सागर में इसका मिलना अपने आप में हैरान करने वाली घटना है. यह इस बात का संकेत है कि दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा के लिए और ज्यादा जागरूकता की जरूरत है.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें