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Ujjain News: मध्यप्रदेश के उज्जैन में जमीन के दस्तावेज बनाने के लिए तीन लोगों ने फर्जी अंतिम संस्कार का षड्यंत्र रचा. कैसे हुआ झूठ का भंडाफोड़ जानिए पूरी कहानी…
दरअसल, पूरा मामला 16 सितंबर का बताया जा रहा है जहां एक बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार कराने के लिए श्मशान घाट पर पहुंचता है. मजे की बात ये है कि बेटा चंद लोगों के साथ बिना किसी लाश के ही घाट पर उपस्थित होता है. अंतिम संस्कार के लिए घाट से बकायदा लकड़ी और कंडे मंगाए जाते हैं. रसीद लिखते वक्त मृत व्यक्ति का नाम-पता बड़े ही ध्यान से लिखवाया जा रहा था. ये वही समय था जब श्मशान के कर्मचारियों को दाल में कुछ काला लगा. घाट के कर्मचारियों को शक हुआ तो पकड़ा गया.
शक होने पर कर्मचारियों ने पूछताछ की और पुलिस बुलाई. पुलिस बेटे को थाने ले गई जिसके बाद असली कहानी सामने आई. बेटे ने बताया कि उसके पिता लालचंद की मौत एक साल पहले ही हो गई थी. परिजनों से अंतिम संस्कार की रसीद गुम हो गई जिसकी वजह से डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पाया है. मृत्यू प्रमाण पत्र नहीं होने से समग्र आईडी और प्रॉपर्टी संबंधित कागजों को बनवाने में परेशानी आ रही थी इसलिए अंतिम संस्कार का षडयंत्र रचा गया.
सालभर का इंतजार फिर पहुंच गया शमशान
पुलिस ने बताया कि पिता-पुत्र तारीख मिलाकर रसीद बनवाने श्मशान पहुंचे थे. लालचंद की मौत 15 सितंबर 2024 को हुई थी और 16 सितंबर को दाह संस्कार हुआ था. बेटे ने इसी तारीख को मिलाया. पुलिस का कहना है कि इस रसीद के माध्यम से जमीन या बैंक से राशि निकालने का पता चलता है तो दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
अगर रसीद घूम जाए तो क्या करे
चक्रतीर्थ के प्रबंधन अध्यक्ष अशोक प्रजापत ने रसीद गुम जाने को लेकर जानकरी दी और कहा कि किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार पर चक्रतीर्थ से जो रसीद दी जाती है, अगर वह गुम हो जाए तो परिजन शपथ पत्र और पहचान पत्र के आधार पर रसीद को दोबारा बनवा सकते हैं. इसके लिए किसी भी तरह की धोखाधड़ी की जरूरत नहीं है.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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