यूरिया, डीएपी न मिले तो किसान क्या करें? एक्सपर्ट ने बताया कारगर और सस्ता विकल्प, फसल-मिट्टी दोनों को फायदा

यूरिया, डीएपी न मिले तो किसान क्या करें? एक्सपर्ट ने बताया कारगर और सस्ता विकल्प, फसल-मिट्टी दोनों को फायदा


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Agriculture Tips: अगर किसान यूरिया या डीएपी से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इससे बेहतद विकल्प नहीं मिलेग. ये विकल्प कारगर तो है ही, सस्ता भी है. एक्सपर्ट से जानें सब…

Agri Tips: मध्य प्रदेश में यूरिया, डीएपी की भारी कमी है. इसी कड़ी में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को यूरिया की कमी को पूरा करने के लिए बेहतर विकल्प सुझाए हैं. कृषि विभाग ने किसानों को बताया कि यूरिया की जगह अमोनियम सल्फेट का उपयोग फसलों की उर्वरता और उत्पादन के लिए अधिक लाभकारी है.

अमोनियम सल्फेट नाइट्रोजन के साथ-साथ सल्फर पोषक तत्व भी प्रदान करता है, जो फसल की वृद्धि और मिट्टी की उर्वरता के लिए महत्वपूर्ण है. इसमें पाया जाने वाला अमोनिकल नाइट्रोजन लंबे समय तक स्थायी रहता है, जबकि यूरिया का नाइट्रोजन हवा में उड़ सकता है या पानी में घुलकर नष्ट हो सकता है.

किसानों का बचेका खर्च
अमोनियम सल्फेट में 20.5 प्रतिशत अमोनिकल नाइट्रोजन और 23 प्रतिशत सल्फर होता है. यह न केवल फसल के लिए असरदार है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखता है. सल्फर की पर्याप्त मात्रा के कारण किसानों को अलग से सल्फर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. इसका उपयोग फसल उत्पादन बढ़ाने, कीटनाशक और दवा के खर्च को कम करने में भी मदद करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे फास्फोरस का बेहतर उपयोग होता है और डीएपी की खपत घटती है.

मिट्टी उर्वरा शक्ति भी बढ़ाते हैं….
रीवा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अतेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि किसान प्राकृतिक विकल्पों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, सरसों की खली नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती है. यह धान के पौधों की वृद्धि और उपज के लिए आवश्यक है. इसके अलावा, खली में कार्बनिक पदार्थ भी मौजूद होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों की जड़ों को गहराई तक पोषण देते हैं.

साथ ही गोबर की खाद और दलहनी फसलें भी यूरिया की कमी को प्राकृतिक रूप से पूरा करती हैं. दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती हैं और अगले चरण की फसल को स्वस्थ बनाती हैं. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से आग्रह किया है कि यूरिया न मिलने पर केवल अमोनियम सल्फेट का उपयोग करें और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर मिट्टी और फसल की सेहत दोनों बनाए रखें.

कुल मिलाकर, अमोनियम सल्फेट और प्राकृतिक विकल्प किसानों को यूरिया की कमी के बावजूद फसल उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से किसानों को लागत कम करने, फसल की गुणवत्ता बढ़ाने और लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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