कोरी घाट पर धाम लगाकर दो महिलाओं के पास लोग एक एक करके आशीर्वाद लेने और समस्याओं का निदान कराने पहुंचे।
आज भूतड़ी अमावस्या के मौके पर मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, हरदा, जबलपुर, डिंडौरी समेत कई जिलों के नर्मदा घाटों पर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। मात्र स्नान ही नहीं, बल्कि भूतड़ी अमावस्या पर कष्ट दूर करने और आत्माओं की शांति के लिए विशेष पू
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20 सितंबर की रात, यानी चौदस और अमावस्या की काली रात को नर्मदा घाटों पर अलग ही माहौल देखा गया। परिजन और तांत्रिक (पडिहार) धाम लगाकर प्रेतबाधा दूर करने तथा देवी-देवताओं को मनाने की क्रियाएं कर रहे थे। भजन-कीर्तन और ढोलक-झांझ की थाप पर महिलाएं-पुरुष झूमते दिखे। कई बार डरावनी आवाजें भी निकाली गईं जिससे माहौल रहस्यमय हो गया।
सेठानी घाट पर प्रेतबाधा निवारण सेठानी घाट पर धाम लगाकर भूत बाधित लोगों का उपचार किया गया। रात 12 बजे इंदौर से आए एक युवक के शरीर में देवी की हवा आने पर उसे नर्मदा नदी के तीन सीढ़ी नीचे खड़ा किया गया। उसके साथी उसे सम्हालते रहे, जबकि अन्य जंजीर, तलवार, डंडे पूजन के लिए साथ में खड़े थे।
दीपक लगाकर देवी देवता का आव्हान कर रात्रि जागरण।
इंदौर से आया श्रद्धालुओं का जत्था इंदौर से आए करीब 120 श्रद्धालुओं ने कोरी घाट पर रात्रि विश्राम करते हुए हवन किया और देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ पूजा-अर्चना की। दो महिलाएं, जिन्हें देवी माना जाता है, मुकुट और चुनरी पहनकर लोगों की समस्याएं सुनतीं और समाधान बतातीं। इसे पवित्र आशीर्वाद समझा जाता है।
सुख, शांति, और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है श्रद्धालु रोहित पवार और शैलेंद्र पाटीदार ने बताया कि वे हर साल पितृ पक्ष की चौदस और अमावस्या की रात नर्मदा के घाट पर आते हैं। भूतड़ी अमावस्या को विशेष मानते हुए वे अतृप्त आत्माओं की तृप्ति के लिए पूजा करते हैं। यहां स्नान एवं तर्पण से सुख, शांति, और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।

भजन गाकर रात्रि जागरण।
100 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात नर्मदा के प्रमुख घाटों जैसे सेठानी, पर्यटन, कोरी, विवेकानंद, बांद्राभान पर दो डीएसपी, पांच पुलिस निरीक्षक, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी सहित करीब 100 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात हैं। एसडीओपी जितेंद्र पाठक ने बताया कि पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिसके लिए रात 3 बजे से सुरक्षा व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है।

रात्रि में सेठानी घाट श्रद्धालुओं से भरा रहा।
पैर रखने की जगह भी नहीं बची विश्व प्रसिद्ध सेठानी घाट पर नर्मदापुरम के अलावा हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, नागपुर, देवास, शाजापुर, विदिशा, महू, भोपाल समेत कई शहरों से श्रद्धालु पहुंचे। रात 12 बजे तक घाट श्रद्धालुओं से पूर्णतः भर गया था और पैर रखने की जगह भी नहीं बची थी।
यह भूतड़ी अमावस्या धार्मिक आस्था, सेवा एवं संस्कार का अद्भुत मिलन है, जो हजारों श्रद्धालुओं को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

सेठानी घाट पर बड़ी संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु।