रंग-बिरंगे पंख, कौड़ी… लोगों को भाया सीएम मोहन यादव का देसी अंदाज, खूब हो रही चर्चा

रंग-बिरंगे पंख, कौड़ी… लोगों को भाया सीएम मोहन यादव का देसी अंदाज, खूब हो रही चर्चा


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Balaghat News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कटंगी में 6.69 लाख किसानों के खातों में 337 करोड़ रुपए का बोनस सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किया. इस दौरान उन्होंने 243 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी. कार्यक्रम में सीएम का स्वागत गोवारी आदिवासी नृत्य और पारंपरिक साफा पहनाकर किया गया, जो आकर्षण का केंद्र बना.

बालाघाट. मध्य प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव का बालाघाट जिले के कटंगी में आगमन हुआ. यहां पर उन्होने 6 लाख 69 हजार 272 किसानों के खाते में 337.12 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक के माध्यम से भेजे, यानी धान किसानों को बोनस के रूप में प्रति हेक्टेयर 4 हजार रुपए दिए गए. इस बीच उन्होंने कटंगी विधानसभा के लिए 243 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की, लेकिन सीएम मोहन यादव ने हाथों में सूपा लिया और अनाज को उसमें साफ करते हुए नजर आए. इन सब के बीच मुख्यमंत्री का स्वागत गोवारी आदिवासी नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बजा कर किया गया. इस बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचा गोवारी-आदिवासी साफा ने, जिसे विधायक गौरव सिंह पारधी ने अपने हाथों से सीएम मोहन यादव को पहनाया. लोगों को उनका देसी अंदाज काफी पसंद आया. इसकी चर्चा पूरे प्रेदश में हो रही है.

विधायक गौरव सिंह पारधी ने बताया कि जिस साफे से सीएम मोहन यादव को पहनाकर स्वागत किया गया वह गोवारी आदिवासी समाज का है, जिसमें रंग बिरंगे पंख और कौड़िया लगी हुई थी. यह साफा मुख्यमंत्री पर खुब जच रहा था, जो पूरी सभा में सबसे आकर्षण का केंद्र रहा. विधायक पारधी ने बताया कि यह गोवारी आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल है. ऐसा माना जाता है कि आदिवासी समाज में कौड़ियों का अहम रोल है, जो साज सज्जा और पारंपरिक गहने बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. सफेद कौड़ियां नकारात्मकता को दूर करती है.

आदिवासी-गोवारी नृत्य से हुआ स्वागत
सीएम के स्वागत में आदिवासी गोवारी नृत्य का आयोजन हुआ, जहां पर कटंगी के आदिवासी गोवारी समाज के युवक और युवतियों ने पीले वस्त्र पहन कर नृत्य किया, जो सीएम मोहन यादव को खूब भाया. इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र बजते रहे, जिसकी थाप पर आदिवासी गोवारी नृत्य देखने को मिला. आपको बताना जरूरी है कि ये आदिवासी नृत्य दीवाली के बाद से शुरू होता है, जो मंडई-मेलों में किया जाता है.

आदिवासी गोवारी समाज खासतौर से महाराष्ट्र के भंडारा और नागपुर जिले में निवासरत है, लेकिन मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के कटंगी क्षेत्र इस समुदाय की संख्या काफी है. इसके अलावा सिवनी और छिंदवाड़ा जिले की महाराष्ट्र सटे हुए इलाके में ये समाज रहता है. गोवारी समुदाय को आदिवासी तो कहा जाता है लेकिन उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है. उनका रहन-सहन, खान-पान और संस्कृति आदिवासियों जैसी है. ऐसे में गोवारी समुदाय से आने वाले लोग लंबे समय से एसटी का दर्जा चाहते हैं.

Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across … और पढ़ें

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