भारत में पहली बार वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप… नई दिल्ली में रंगारंग आगाज, 104 देश के 2200 एथलीट ले रहे हिस्सा

भारत में पहली बार वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप… नई दिल्ली में रंगारंग आगाज, 104 देश के 2200 एथलीट ले रहे हिस्सा


भारत की मेजबानी में पहली बार हो रहे वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 का 25 सितंबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू इंटरनेशनल स्टेडियम में रंगारग आगाज हुआ. 27 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चलने वाले इस इवेंट में 104 देशों के 2200 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. भारत से 73 एथलीट वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में एक्शन में होंगे.  भारत वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी करने वाला चौथा एशियाई देश है. इससे पहले कतर (2015), यूएई (2019) और जापान (2024) में यह आयोजन हो चुका है.

इतिहास रचने पर भारत की नजरें

भारत की नजरें वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में इतिहास रचने पर होंगी. जापान के कोबे में, भारत ने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, जिसमें कुल 17 पदक (6 स्वर्ण, 5 सिल्वर, 6 ब्रॉन्ज) जीतकर कुल मिलाकर 6वें स्थान पर रहा था. 2023 में पेरिस में भारत ने पहले ही 10 पदक (3 स्वर्ण, 4 सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज) जीतकर अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था. अब भारत की कोशिश अपने घर में सबसे ज्यादा पदक जीतने पर होगी.

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उद्घाटन समारोह

रंगारंग उद्घाटन समारोह में माननीय केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, संसद सदस्य श्रीमती कंगना रनौत, दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स के प्रमुख श्री पॉल फिट्जगेराल्ड ने हिस्सा लिया. डॉ. मंडाविया ने इस मौके पर कहा, ‘भारत के लिए यह विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप गर्व, प्रगति और उद्देश्य के बारे में है. हमने अपने सबसे बड़े पैरा दल को इकट्ठा किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि पैरा-स्पोर्ट्स ने देश में कितनी गहरी जड़ें जमा ली हैं. सुमित अंतिल, प्रीति पाल, दीप्ति जीवनजी, धरमबीर नैन और प्रवीण कुमार जैसे चैंपियन अपनी घरेलू धरती पर मुकाबला करेंगे.’

पीएम मोदी ने जताया गर्व

भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक दिन पर माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इंडियनऑयल नई दिल्ली 2025 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप (WPAC) की मेजबानी भारत को दुनिया के सामने एक ‘खेल-प्रेमी और समावेशी’ राष्ट्र के रूप में पेश करेगी. पीएम मोदी ने अपने विशेष संदेश में कहा, ‘सीमाओं को तोड़कर और नए कीर्तिमान स्थापित करके, पैरा एथलीटों ने भारत की पहचान को एक उभरते हुए खेल केंद्र के रूप में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे लाखों लोगों को खेल को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा मिली है.’

WPAC 2025 की मेजबानी पर भारत को गर्व महसूस करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘खेल में लोगों को जोड़ने का एक शानदार तरीका है, जो धर्म, क्षेत्र और राष्ट्रीयता की सभी बाधाओं को पार करता है. आज की दुनिया में खेल के इस एकजुट करने वाले पहलू पर जोर देना और भी महत्वपूर्ण है. मुझे यकीन है कि WPAC का सभी प्रतिभागियों और दर्शकों पर ऐसा ही असर पड़ेगा.’

पीएम मोदी ने पैरा स्पोर्ट्स में भारत के बढ़ते दबदबे की भी सराहना की. उन्होंने कहा, ‘पैरा एथलीटों के शानदार प्रदर्शन ने लचीलेपन और दृढ़ संकल्प के अर्थ को फिर से परिभाषित किया है, जिससे दुनिया भर के खिलाड़ियों और आम लोगों को प्रेरणा मिली है. उनकी उपलब्धियों ने एक सामूहिक विश्वास जगाया है कि कोई भी चुनौती असंभव नहीं है.’

WPAC जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में नए बिछाए गए मोंडो ट्रैक पर होने वाला पहला कार्यक्रम होगा. नीले रंग के शेड्स वाला यह ट्रैक, जिसे पेरिस पैरालंपिक 2024 में इस्तेमाल किया गया था, उसका उद्घाटन डॉ. मंडाविया ने राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) पर किया था. गुरुवार को, डॉ. मंडाविया ने स्टेडियम परिसर में एक मोंडो वार्म-अप ट्रैक और एक मल्टी-स्पेशियलिटी जिमनेजियम का भी उद्घाटन किया, जहां 200 से अधिक एथलीट एक साथ ट्रेनिंग ले सकते हैं.

‘ओलंपिक की मेजबानी पर नजरें’

डॉ. मंडाविया ने यह भी कहा, ‘हम राष्ट्रमंडल खेल 2030 की योजना में गहराई से जुटे हैं और हमारी निगाहें 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी पर टिकी हैं. जैसा कि प्रधान मंत्री ने कहा है, ‘खेल न केवल चैंपियन बनाता है, यह शांति, प्रगति और कल्याण को भी बढ़ावा देता है.’ यही हमारी खेल यात्रा का मार्गदर्शक प्रकाश है.’ उन्होंने कहा: ‘बुनियादी ढांचे या महत्वाकांक्षा से परे एक गहरी विरासत है. एक बदला हुआ माइंडसेट. हम सुलभ स्थल, पैरा-एथलीटों के लिए मजबूत सहायता प्रणाली, और खेल में समान अवसर के बारे में एक नई राष्ट्रीय बातचीत छोड़ जाएंगे. ये ही वे सच्चे परिणाम हैं जो पदक दिए जाने के बाद भी बने रहेंगे.’





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