भोपाल में प्रदेश के करीब 1335 मनरेगा उपयंत्री पिछले 35 दिनों से अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। शुरुआत 10 दिन के सामूहिक अवकाश से हुई थी, जिसके बाद से कलमबंद हड़ताल जारी है। अब अभियंताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे
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मनरेगा अभियंता संघ का कहना है कि वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नीति जारी की थी। यह नीति खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पाठ्यपुस्तक निगम जैसे विभागों में लागू हो चुकी है, लेकिन मनरेगा में अभी तक लागू नहीं हुई।
संघ का कहना है कि इस नीति के लागू होने से उन्हें अनुकंपा नियुक्ति, ग्रेच्युटी और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
मंत्री और अधिकारियों से मुलाकात भी बेनतीजा संघ के प्रतिनिधिमंडल ने पंचायत मंत्री, अपर मुख्य सचिव और कमिश्नर स्तर तक अपनी बात रखी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। नाराज अभियंताओं ने कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का भी रुख करेंगे।
15 साल से जारी संघर्ष अभियंताओं का कहना है कि वे पिछले 15 साल से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संविदा कर्मचारियों को लाभ देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक यह पूरी नहीं हुई। संघ ने स्पष्ट कहा है कि लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।