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Amazing Facts: सागर सिर्फ एक शहर नहीं, मध्यप्रदेश का गौरव है. यहां की पहली यूनिवर्सिटी, पहली जेल, पुलिस ट्रेनिंग, और फॉरेंसिक लैब ने राज्य के इतिहास में खास स्थान बनाया है.
मध्य प्रदेश के बीचों बीच स्थित होने की वजह से सागर को प्रदेश का दिल कहा जाता है. आज हम कुछ ऐसी चीज आपको बताने जा रहे हैं, जिन बातों को जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

सागर के डॉक्टर हरीसिंह गौर साहब ने जिंदगी भर की अपनी गाड़ी कमाई कर मध्य प्रदेश के पहले विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1946 में स्थापित की थी और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की ज्योत जलाई, यह आज भी दुनिया भर में एक लोटा ऐसा उदाहरण है, जहां केवल एक व्यक्ति ने अपनी करोड़ों की संपत्ति दान कर विश्वविद्यालय खुलवाया. सेंट्रल यूनिवर्सिटी को डॉक्टर हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है.

सागर में मध्य प्रदेश की पहली पुलिस ट्रेनिंग अकादमी की स्थापना सागर में हुई थी. साल 1906 से सागर के मुख्य किला में यह एकेडमी संचालित हो रही थी. पहले पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के रूप में शुरुआत हुई थी, बाद में इसे कॉलेज का दर्जा मिला जो आज भी है.

मध्य प्रदेश की पहली जेल भी सागर में ही है. सन 1843 में बुंदेला विद्रोह की वजह से अंग्रेजों ने जेल खोली थी. आज 180 साल बाद भी उसी जगह पर स्थित है. यहां 1160 बंदी की क्षमता वाला लॉकअप है, तो सेंट्रल जेल है.

मध्य प्रदेश की पहली फॉरेंसिक लैब भी सागर में ही स्थापित की गई थी. बताया जाता है कि देश में पचास के दशक में एक केन्द्रीय प्रयोगशाला कलकत्ता में थी. 1964 में मध्यप्रदेश राज्य में भी, पुलिस प्रशिक्षण का केन्द्र तथा विश्वविद्यालय में अपराध शास्त्र एवं फोरेंसिक साइन्स विभाग का होना, वे मुख्य कारण थे जिससे राज्य फोरेंसिक साइन्स प्रयोगशाला को स्थापना का सुअवसर सागर नगर को मिला .

बुंदेलखंड की पहली और एकमात्र कैंट छावनी भी सागर में ही है, सागर में कैंट छावनी की स्थापना 1 सितंबर 1835 को हुई थ. यह छावनी मूल रूप से नर्मदा डिवीजन के मुख्यालय के रूप में और फिर एक इक्वेशन स्कूल के रूप में स्थापित की गई थी.

मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रवि शंकर शुक्ला का जन्म भी सागर में ही हुआ था. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ हुए आंदोलन में भी सक्रिय रहे. गांधी जी के कहने पर अविभाजित मध्य प्रदेश के रायपुर चले गए थे पंडित शुक्ल का जन्म सागर के की खुशीपुरा में हुआ था.