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GK: कहां और कब बना था RSS, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कैसे पड़ा इसका नाम?

Madhya Pradesh Samachar01/10/2025
GK: कहां और कब बना था RSS, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कैसे पड़ा इसका नाम?


RSS GK, RSS 100 Years Celebration: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 2025 में अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं. आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का शताब्दी समारोह भी मनाया गया. जिसमें पीएम नरेन्‍द्र मोदी भी शामिल हुए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मारक डाक टिकट और चांदी का सिक्का जारी किया. बता दें कि आरएसएस की नींव वर्ष 1925 में डॉ.केशव बलराम हेडगेवार ने महाराष्‍ट्र के नागपुर में रखी थी. आज ये संगठन भारत में समाज,संस्कृति और राष्ट्रवाद के लिए जाना जाता है.आइए जानते हैं आरएसएस से जुडे 10 सवालों के जवाब…

1. आरएसएस कब और कहां शुरू हुआ?
जवाब: आरएसएस की शुरुआत 1925 में महाराष्ट्र के नागपुर में हुई. इसे डॉ.केशव बलराम हेडगेवार ने शुरू किया था.

2. संगठन का नाम चुनना कब और क्यों जरूरी हो गया?
जवाब: 1926 में जब आरएसएस को शुरू हुए 7 महीने होने वाले थे.डॉ.हेडगेवार ने 17 अप्रैल को अपने घर पर एक मीटिंग बुलाई. दरअसल नागपुर के रामटेक में रामनवमी के मेले में भीड़ को काबू करने के लिए अनुशासित स्वयंसेवकों की जरूरत थी. इसके लिए संगठन का एक नाम चाहिए था, ताकि लोग इसे भीड़ का हिस्सा न समझें.

3. उस मीटिंग में कितने लोग थे और नाम कैसे चुना गया?
जवाब: मीटिंग में 26 स्वयंसेवक आए थे.डॉ.हेडगेवार ने सबको बोला कि संगठन का नाम सुझाओ. फिर खूब चर्चा हुई और वोटिंग से नाम फाइनल किया गया.

4. कौन-कौन से नाम सुझाए गए थे?
जवाब: तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आए:
1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
2. जरी पटका मंडल
3. भारतोद्धार मंडल
इसके अलावा शिवाजी संघ, महाराष्ट्र स्वयंसेवक संघ और हिंदू स्वयंसेवक संघ जैसे नाम भी आए.

5. आखिर में कौन सा नाम चुना गया और कैसे?
जवाब: वोटिंग में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ को 20 वोट मिले और ये नाम पक्का हो गया.जरी पटका मंडल को 5 वोट मिले और भारतोद्धार मंडल को बस एक वोट,वो भी उस शख्स का जिसने ये नाम सुझाया था.

6. ‘जरी पटका मंडल’ नाम का क्या मतलब था और इसे किसने सुझाया?
जवाब: जरी पटका मंडल का नाम पेशवाई और भगवा झंडे से जुड़ा था जिसे हिंदू संस्कृति में बहुत सम्मान मिलता है.ये नाम एक कॉलेज के पहले साल के स्टूडेंट ने सुझाया था,जो बाद में जज बना.

7. डॉ.हेडगेवार ने ‘महाराष्ट्र स्वयंसेवक संघ’ या ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ’ जैसे नाम क्यों नहीं चुने?
जवाब: हेडगेवार का कहना था कि संगठन सिर्फ एक राज्य या एक महापुरुष तक सीमित नहीं रहना चाहिए.उनका मकसद पूरे भारत को जोड़ना था.‘हिंदू’शब्द की जगह ‘राष्ट्रीय’इसलिए चुना क्योंकि ये पूरे देश को कवर करता है.

8. क्या नाम चुनने के बाद कोई बहस हुई?
जवाब: हां, कई लोगों को ‘हिंदू’शब्द न होने की वजह से शिकायत थी.इस पर काफी बहस हुई, लेकिन हेडगेवार ने ‘हिंदू’की व्यापकता समझाई और लंबी चर्चा के बाद ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’नाम फाइनल हुआ.

9. उस मीटिंग में प्रोफेसर पीके सावलापुरकर ने क्या किया?
जवाब: प्रोफेसर सावलापुरकर उस मीटिंग में थे. उन्होंने बताया कि ‘जरी पटका मंडल’ नाम एक स्टूडेंट ने सुझाया था.नाम फाइनल होने के बाद हेडगेवार ने उनसे ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ नाम का मतलब समझाने को कहा और वो आधा घंटा बोले.

10. नाम की इस कहानी से आरएसएस का मकसद कैसे समझ आता है?
जवाब: इस कहानी से पता चलता है कि आरएसएस का मकसद सिर्फ एक जगह या समुदाय तक सीमित नहीं था. ये पूरे भारत को एकजुट करने और समाज की सेवा करने के लिए बना था.‘राष्ट्रीय’ शब्द इसके बड़े विजन को दिखाता है.

सोच समझकर चुना गया नाम

आरएसएस के 100 साल पूरे होने की इस कहानी से साफ है कि इसका नाम आसानी से नहीं चुना गया. डॉ.हेडगेवार और उनके स्वयंसेवकों ने सोच-समझकर और सबकी राय लेकर ऐसा नाम चुना, जो आज भी इसके राष्ट्रीय मकसद को बयां करता है.



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