Agriculture Tips: बरसाती क्षेत्र के अनुभवी किसान भागीरथ पटेल जी, जिन्होंने अपने खेत में तुरई की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया है. आइए जानते हैं उन्हीं से कि आखिर क्यों ये समय तुरई की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त है.
किसान भागीरथ पटेल कहते है कि मैं पिछले पाँच सालों से बरसाती क्षेत्र में तुरई की खेती कर रहा हूँ, खासकर मक्का, मूंग, उड़द या सोयाबीन की फसल के बाद. बारिश के बाद खेतों में जो प्राकृतिक नमी बनी रहती है, वो तुरई के लिए बहुत फायदेमंद होती है. तुरई एक ऐसी सब्जी है जो नमी में तेजी से बढ़ती है और ज्यादा देखरेख नहीं मांगती.”
क्यों करें तुरई की खेती बरसात के बाद?
क्यों बरसात के बाद तुरई की खेती करना फायदेमंद होता है–
1. मिट्टी में नमी:
बरसात के बाद खेतों में पर्याप्त नमी होती है, जो तुरई के बीजों के अंकुरण के लिए आदर्श है.
2. कम लागत में ज्यादा मुनाफा:
तुरई की खेती में उर्वरकों और सिंचाई की लागत कम आती है, और 45-60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है.
3. बाजार में मांग:
तुरई की मांग पूरे साल बनी रहती है, खासकर बरसात के बाद जब दूसरी सब्जियों की कमी होती है.
खेती कैसे करें?
किसान भागीरथ पटेल बताते है कि अगर आप तुरई की खेती करना चाहते हैं, तो सबसे पहले ढालदार या समतल जमीन चुनें, जिसमें पानी ना रुके.फिर खेत की अच्छी जुताई करें और गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें.इसके बाद 1-2 फीट की दूरी पर बीज बो दें. हर बीज की जगह पर जैविक खाद डालना ना भूलें फसल को ज्यादा पानी नहीं चाहिए, लेकिन शुरुआत के 15 दिन नमी बनाए रखना ज़रूरी होता है. तुरई की बेल को चढ़ाने के लिए जाल या खंभों का सहारा दें, जिससे फल सीधे लटकें और साफ रहें.”
बीज का चयन भी जरूरी है. भागीरथ जी बताते हैं कि आप ‘अंगुरी तुरई’, ‘हरी चुनरी’, या ‘पूसा नस्ल’ जैसे स्थानीय बीज चुन सकते हैं. ये बीज जल्दी फल देते हैं और रोग प्रतिरोधक होते हैं. साथ ही, खेती में जैविक खाद और नीम की खली, पंचगव्य जैसी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करें, ताकि फसल सुरक्षित और स्वादिष्ट हो.
तुरई की फसल कब तैयार होती है?
किसान बताते है कि”तुरई की फसल 45 से 60 दिन में तोड़ने लायक हो जाती है. हर दो से तीन दिन में तोड़ाई करनी पड़ती है, जिससे पौधा ज्यादा फल देता है.एक बीघा जमीन से आप आसानी से 60 से 80 क्विंटल तक तुरई निकाल सकते हैं, और बाजार में