6th नेशनल कार्डियो प्रिवेंट कॉन्फ्रेंस में एक्सपर्ट जताई चिंता।
स्वच्छता में इंदौर भले ही आठ बार देश में सिरमौर रहा है, लेकिन अब इंदौरियों की सेहत तेजी से खराब हो रही है। यहां स्वच्छ इंदौर के साथ स्वस्थ इंदौर बनाने पर जोर दिया जा रहा हो, लेकिन मेडिकल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इंदौर हार्ट क्लब ने 4 लाख लोगों की स
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इंदौर में आयोजित दो दिवसीय 6th नेशनल कार्डियो प्रिवेंट कॉन्फ्रेंस में आए एक्सपर्ट।
शहर के बच्चों और युवाओं में खराब लाइफ स्टाइल के कारण हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसे लेकर देश-विदेश के कार्डियोलॉजिस्ट्स ने चिंता जताई है। USA के एक्सपर्ट ने कहा है कि इंदौर अब तेजी से बीमार हो रहा है, जो बहुत चिंताजनक है। बेहतर है कि बच्चे और युवा अपनी खराब लाइफ स्टाइल को तुरंत सुधारें और मोटापे पर नियंत्रण करें अन्यथा स्थिति और भयावह होगी। यह निष्कर्ष कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (CSI) द्वारा इंदौर में आयोजित दो दिवसीय 6th नेशनल कार्डियो प्रिवेंट कॉन्फ्रेंस में निकला है। यह मैसेज कई शहरों के लिए है, लेकिन खास बात यह कि कॉन्फ्रेंस में ‘इंदौर हार्ट क्लब’ ने जो रिपोर्ट पेश की तो हेल्थ एक्सपर्ट और रिसर्चर चौंक गए। कॉन्फ्रेंस में दो घंटे तक इसके कारणों और प्रिवेंशन पर ही चर्चा हुई। जानिए क्या कहते हैं हार्ट एक्सपर्ट्स

USA से आए कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. प्रकाश डिडवानिया।
कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. प्रकाश डिडवानिया (यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क, सेन फ्रांसिसको, USA) ने बताया कि भारत में जिस प्रकार हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं, यह बहुत चिंताजनक है। इंदौर की स्थिति चौंकाने वाली और चिंताजनक हैं। इंदौर के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पतालों से जुड़े हार्ट क्लब के डॉक्टरों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में डेटा प्रेजेंटेशन दिया तो हम सभी चौंक गए।

प्रिवेंशन संभव, लेकिन लोग गंभीर नहीं डॉ. प्रकाश डिडवानिया ने कहा कि इंदौर की सेहत अच्छी नहीं है। इसमें डॉक्टरों, पोस्ट ग्रेजुएट्स के सवाल भी कई थे। अब हार्ट डिसीज और इससे जुड़े रिस्क फैक्टर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। अब बच्चे, जवान, बुजुर्गों सहित सभी में रिस्क फैक्टर्स बढ़ रहे हैं। यहां आए दिन अचानक किसी बच्चे, युवा, महिला आदि की हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट से मौत का कारण खराब लाइफ स्टाइल और मोटापा है।
यानी जिन्हें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रोल, मोटापा ये सभी खराब लाइफ स्टाइल के फैक्टर्स हैं। इन्हें तो प्रिवेंट किया जा सकता है लेकिन लोग गंभीर नहीं हैं। कॉन्फ्रेंस का पूरा सार यही निकला है कि बढ़ती हार्ट डिसीज को नियंत्रण करने के लिए प्रिवेंशन सबसे बेहतर है। अभी सबसे पहले जरूरत है कि हायपरटेंशन, डायबिटीज को बचपन से ही प्रिवेंट कर लें। दुनिया में भी मोटापा बहुत बढ़ रहा है। डॉ. एचके चोपड़ा (दिल्ली) ने बताया कि हार्ट संबंधी कोई भी बीमारी के पूर्व सबसे जरूरी है प्रिवेंशन। हार्ट के जोखिम के बहुत सारे फैक्टर्स हैं। इनमें से एक खास फैक्टर मोटापा है। पेट की गोलाई यानी तोंद होती है उस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

प्रिवेंशन बेटर देन द क्योर

डॉ. प्रो. मनचंदा और डॉ. एके पंचोलिया।
प्रो. मनचंदा (दिल्ली) ने बताया कि हार्ट की बीमारियों के इलाज में लाखों खर्च की तुलना में प्रिवेंशन बहुत सस्ती चीज है। जब लोगों को पता रहता है कि हार्ट की बीमारियां क्यों होती है तो उन्हें पहले ही प्रिवेंट करना चाहिए। नीचे दिए चार रिस्क फैक्टर्स पर काबू पा लिया जाए तो बेहतर नतीजे मिलेंगे।

मोटापा कंट्रोल करने के लिए अब एडवांस इंजेक्शन भी साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. एके पंचोलिया ने योग को रोजमर्रा की आदत में शामिल करने की सलाह दी, क्योंकि यह तनाव घटाता है, शरीर व मन को स्वस्थ रखता है और मोटापा कम करने में मदद करता है। उन्होंने नए इंजेक्शन के बारे में भी जानकारी दी जो शरीर के फैट को कम करने में मददगार हैं। इनका असर तभी स्थायी रहेगा जब जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जारी रहें।
उन्होंने प्रदूषण को भी हृदय रोग का एक कारण बताया और सरकार से उचित कदम उठाने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी देश में बढ़ते हृदय रोगों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि मोटापा और एयर पॉल्युशन हमारे स्वास्थ्य के सबसे बड़े दुश्मन हैं। अगर हमने अभी से इनसे लड़ाई नहीं लड़ी, तो आने वाले समय में हर घर में हृदय रोगी होगा। शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है फैट ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विद्युत जैन ने बताया कि मोटापा हार्ट डिसीज का प्रमुख कारण है। शरीर में जमा फैट धीरे-धीरे हार्ट और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों और युवाओं में हृदय व स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
फैट पर काबू पाएं, ये करें
- लोग घर का खाना खाएं, प्रोटीनयुक्त आहार जैसे दाल और टोफू को रोजाना की डाइट में शामिल करें।
- हल्की-फुलकी एक्सरसाइज, साइकिलिंग या वॉक को अपनी दिनचर्या में रखें।
ज्यादा नमक, शुगर और तली चीजें खतरनाक

कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. राकेश जैन।
ऑर्गेनाइजिंह सेक्रेटरी डॉ. राकेश जैन ने बताया कि हमारे पूर्वज सौ सालों से यह खाना खाते आए हैं लेकिन उस समय उनका जीवन पूरी तरह अलग था। वे रोजाना पैदल चलते थे, साइकिल चलाते थे, खेतों में मेहनत करते थे। आज के समय में लोग छोटी-सी मॉर्निंग वॉक भी छोड़ देते हैं। उन्होंने चेताया कि ज्यादा नमक, शुगर और तली-भुनी चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बाजार में उपलब्ध जूस और पैकेज्ड फूड को हेल्दी समझ कर पीना भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इनमें छुपी शुगर और फैट से हार्ट को काफी जोखिम रहता है। दिमाग जानता है, लेकिन दिल मानता नहीं डॉ. जैन ने कहा हमारा दिमाग जानता है कि क्या सही है, लेकिन दिल मानता नहीं। । दिल है कि मानता नहीं लेकिन इतने बड़े शरीर में 250 ग्राम छोटे से दिल को नजाकत से संभालों। जब दिल नहीं बचेगा तो कुछ भी नहीं बचेगा। अब हमें अपने दिल को मनाना होगा। भारत में लोग ‘ज्यूस’ या ‘एनर्जी ड्रिंक’ को हेल्दी मानते हैं, जबकि उनमें भी शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को सभी पैक्ड फूड पर बड़े अक्षरों में कैलोरी, शुगर और फैट की मात्रा लिखना अनिवार्य करना चाहिए ताकि लोग जागरूक हो सकें।
600 से ज्यादा लोग हुए शामिल

कॉन्फ्रेंस में 600 से ज्यादा लोग शामिल हुए।
कॉन्फ्रेंस की शुरुआत सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में आयोजित सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम से हुई। इसमें 600 से अधिक आम जन और स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए। एक्सर्टस ने बताया कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है, बल्कि अब यह युवाओं और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने सही खान-पान, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने को हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी बताया।
इसके अलावा डिबेट सत्र और सवाल-जवाब में आम लोगों और डॉक्टरों ने मिलकर हृदय स्वास्थ्य, जीवनशैली सुधार और बचाव के उपायों पर विचार साझा किए। कांफ्रेंस के दौरान कुल 24 सेशन आयोजित किए गए। एक स्पेशल सेशन ‘साल्ट सत्याग्रह’ पर हुआ। इसमें बताया कि अधिक नमक का सेवन हमारे दिल के लिए कितना नुकसानदायक है। मोटापे का न बढ़ने दिया जाए और मेडिकल चेकअप करवाते रहें।


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मैं न सिगरेट पीता हूं न ही शराब…जिम में एक्सरसाइज भी करता हूं, साथ में खाने का भी विशेष ध्यान रखता हूं। फिर मुझे हार्ट अटैक क्यों आया? यह सवाल हमीदिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 30 साल के राहुल (बदला हुआ नाम) का है।पूरी खबर पढ़ें