विशेष न्यायालय ने रिश्वतखोरी के मामले में पटवारी राजेश धात्रक को तीन साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2020 का है, जब पटवारी ने एक किसान से नामांतरण के लिए 10 हजार रुपए प्रति पावती की रिश्वत मांगी थी।
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लोकायुक्त पुलिस ने 21 जनवरी 2020 को धात्रक को 4 हजार रुपए की घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा था।
नोट निगलने की कोशिश की थी अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी हरिप्रसाद बांके ने बताया कि ग्राम सुरगांव जोशी के किसान मांगीलाल प्यारो (रिटायर्ड टीचर) ने लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत की थी कि पटवारी राजेश धात्रक नामांतरण के बदले रिश्वत मांग रहा है।
शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाया और धात्रक को उसके प्राइवेट ऑफिस से 4 हजार रुपए की घूस लेते पकड़ा। जब पुलिस उसे पकड़कर बाहर ला रही थी, तो उसने अचानक हाथ छुड़ाकर नोट मुंह में डाल लिए और चबाने लगा, ताकि सबूत मिटा सके।
लेकिन पुलिस टीम ने मशक्कत कर नोट मुंह से निकाल लिए और उसे गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट ने दोषी मानते हुए सुनाई सजा जांच पूरी होने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले में विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया।विशेष न्यायाधीश अरविंद सिंह टेकाम ने आरोपी धात्रक को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(क) के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
लोकायुक्त की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी विनोद कुमार पटेल ने पैरवी की।