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Burhanpur Inspiring Story: आज भी कई ऐसे दिव्यांग बच्चें हैं, जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन उनके परिवार की स्थिति ठीक न होने के कारण उनके सपने टूट जाते हैं. ऐसे ही समाज में कुछ समाजसेवी हैं, जो इन दिव्यांग बच्चों के सपनों को साकार करने में मदद करते हैं.
कुछ बच्चे सपने देखते हैं लेकिन परिवार की हालत ठीक न होने के कारण उनके सपने टूटने पर मजबूर हो जाते हैं. लेकिन शहर में आज भी ऐसे समाज सेवी हैं, जो ऐसे बच्चों के सपनों को टूटने नहीं देते हैं. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के महाजनापेठ क्षेत्र में रहने वाली एक दिव्यांग बेटी ने भी अपने सपने जो देखे थे. उसके माता-पिता पूरा नहीं कर पाए लेकिन समाजसेवियों ने यह बेड़ा उठा लिया और आज बेटी ने इतिहास रच दिया है. मध्य प्रदेश में आईआईटी में ऑल इंडिया में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. जिससे पूरा परिवार अपने आप को गौरांवित महसूस कर रहा है.
लोकल18 की टीम जब परिवार से बात की तो उन्होंने बताया कि आज भी कई ऐसे दिव्यांग बच्चे हैं जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन उनके परिवार की स्थिति ठीक न होने के कारण उनके सपने टूट जाते हैं ऐसे ही बच्चों की मदद के लिए कुछ समाजसेवी हैं, जो दिव्यांग बच्चों के सपनों को टूटने नहीं देते हैं. उन्होंने यह बेड़ा उठा कर रखा है. वह उन लोगों की फीस भर उन्हें अच्छी शिक्षा ग्रहण करवा रहे हैं. महाजनापेठ क्षेत्र में रहने वाली सीमा महेंद्र सेवारिक ने बताया कि मेरे पति महेंद्र सेवारिक और मेरे तीन बच्चे हैं, जिसमें से दो बच्चे मेरे दीवान हैं और मेरी बेटी चंचल सेवारिक दिव्यांग है, जो बोल नहीं पाती हैं और न ही सुन पाती है.
उसने भोपाल से आईटीआई में ऑल इंडिया टॉप कर इतिहास रच दिया है. देश में उसका प्रथम स्थान आया है. इसके लिए उन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कौशल विकास केंद्र के द्वारा सम्मानित किया गया. सीमा बताती है कि मेरा बेटा कृष्णा भी आर्ट्स में सेकंड ईयर कर रहा है और एक बेटा प्रथम जो कक्षा 7वीं में पढ़ाई करता है. इन दोनों दिव्यांग बच्चों की फीस समाज सेवी आनंद चौकसे द्वारा भरी जा रही है. जिसके माध्यम से वह अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. वहीं मेरे पास रहने के लिए घर भी नहीं है तो समाज सेवी विजय पारीक द्वारा मुझे 4 साल से रहने के लिए मकान दिया गया है. घर की लाइट बिल से लेकर तो सभी व्यवस्था उनके द्वारा निशुल्क दी जा रही है. मेरे बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण करें क्योंकि मैं खुद कक्षा आठवीं तक पढ़ी हुई हूं, लेकिन बच्चों को अच्छे अफसर बनते देखना चाहती हूं. इसलिए दूसरों के यहां बर्तन मांझ कर पूर्ति कर रही हूं.
समाज सेवी भरते हैं फीस
समाज सेवी आनंद प्रकाश चौकसे द्वारा दोनों दिव्यांग बच्चों को पढ़ने के लिए फीस भरी जा रही है. जिससे दोनों ही बच्चों के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं और वह पढ़ाई में आगे ही बढ़ते जा रहे है. अभी बेटी ने एक कीर्तिमान गढ़ दिया है और बेटा भी आगे पढ़ाई कर रहा है.
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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