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IAS अफसर ऋषव गुप्ता की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि उस सोच की जीत है, जो कहती है, ‘दिल की सुनो क्योंकि वही तुम्हें सही राह दिखाएगा.’
ऋषव गुप्ता ने यह साबित कर दिया कि चाहे शुरुआत कहीं से भी हो, अगर नीयत मजबूत हो तो मंजिल जरूर मिलती है. सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लेकर IAS अफसर बनने तक का यह सफर न केवल प्रेरणादायक है बल्कि उन सभी के लिए एक सीख भी है, जो मुश्किल हालातों में भी नहीं हारते हैं.

IAS ऋषव गुप्ता उन्हीं चुनिंदा लोगों में से एक हैं, जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अपनी शिक्षा और दृढ़ निश्चय के बल पर अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.

ऋषव गुप्ता का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर एक अच्छी नौकरी करे. परिवार का नाम रोशन करे.

IAS ऋषव गुप्ता अभी खंडवा के कलेक्टर हैं और जनता से सीधा संवाद करते हैं.

जब IAS ऋषव गुप्ता ने अपने परिजनों को बताया कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर UPSC परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं, तो सभी हैरान रह गए.

नौकरी छोड़ने के बाद ऋषव गुप्ता ने UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया. एक छोटे से कमरे में रहकर उन्होंने सुबह से रात तक पढ़ाई की.

पहले प्रयास में असफलता हाथ लगी लेकिन ऋषव ने हार नहीं मानी. वह कहते हैं. ‘पहली असफलता ने मुझे यह सिखाया कि मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता.’

IAS ऋषव गुप्ता की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि उस सोच की जीत है, जो कहती है, ‘दिल की सुनो क्योंकि वही तुम्हें सही राह दिखाएगा.’