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भारतीयता हमारे आपसी संकट से मुक्ति का रास्ता है। वह जीने का माध्यम है। सांस्कृतिक रूप से विकसित दिशा में ले जाने का मार्ग है। किसी भी देश-प्रदेश को उसकी भाषा से बिना नहीं जाना जा सकता। भाषा जोड़ने और जुड़ने के लिए जरूरी है। यह केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। उक्त विचार माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय स्नातकोत्तर कन्या महविद्यालय खंडवा में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशन में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में “भारतीय भाषाओं की आवश्यकता और उपयोग” विषय पर देश के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक लीलाधर मंडलोई निदेशक ज्ञानपीठ ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।
वेबिनार के प्रारंभ में विषय का प्रवर्तन करते हुए प्राचार्य डॉ. प्रतापराव कदम ने कहा कि भाषाओं के माध्यम से ही हम भारतीयता का छाता बुन सकते हैं। भारत की भाषाओं में कभी आपस में टकराहट नहीं रही, टकराहट तो हमेशा हमारी महत्वाकांक्षाओं, स्वार्थ के कारण रही है। भारतीय भाषाओं ने तो हमेशा देश को एकता के सूत्र में बांध कर रखा। दूसरे प्रमुख वक्ता डॉ. स्मृति शुक्ला (वरिष्ठ आलोचक एवं प्राचार्य शास. मानकुंवर बाई स्वशासी महावि.जबलपुर) ने “भारतीय भाषाओं में राम” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय भाषाएं भारत की आत्मा है।
भारतीय भाषाओं में वर्णित रामकथाओं में राम, शील, सौंदर्य, मर्यादा के पर्याय बन गए हैं और रामकथा हमारे भावनात्मक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने संस्कृत से लेकर आधुनिक काल तक भारतीय भाषाओं में रची रामकथा और कथाकारों के माध्यम से भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया। इस वेबिनार में स्वागत उद्बोधन डॉ. सीमा मंडलोई (संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष) ने और अतिथि परिचय प्रो.शशांक नाडकर्णी (प्राध्यापक अंग्रेजी) ने दिया। वेबिनार का मंच संचालन डॉ. प्रकाश पगारे प्राध्यापक अर्थशास्त्र ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. तरुण दांगौडे प्राध्यापक हिंदी ने व्यक्त किया। इस राष्ट्रीय वेबिनार में देश भर से प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्रा-छात्राएं ऑनलाइन रुप से जुड़े रहे।