बालाघाट का बंगाली समाज कल से मनाएगा काली उत्सव: गोंदिया से आएगी 12 फीट की प्रतिमा, चार दिन चलेगा आयोजन, 62 साल से चल रही परंपरा – Balaghat (Madhya Pradesh) News

बालाघाट का बंगाली समाज कल से मनाएगा काली उत्सव:  गोंदिया से आएगी 12 फीट की प्रतिमा, चार दिन चलेगा आयोजन, 62 साल से चल रही परंपरा – Balaghat (Madhya Pradesh) News


बालाघाट में बंगाली समाज दीपावली के अवसर पर मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करता है। यह परंपरा 62 वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष भी गोंदिया से 12 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा लाई जाएगी, जिसकी स्थापना के बाद पूरी रात पूजा की जाएगी।

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दीपावली के दिन मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है, जिसके बाद चार दिवसीय काली उत्सव मनाया जाता है। उत्सव का समापन सिंदूर खेला के साथ होता है, जिसके बाद प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

बंगाली समाज की मान्यता है कि मां काली की पूजा से पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और बुराइयों का नाश होता है। इसी आस्था के साथ हर साल यह उत्सव मनाया जाता है।

इस वर्ष बालाघाट में आज रात 10 बजे मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। चार दिवसीय उत्सव के बाद, 24 अक्टूबर को सिंदूर खेला के साथ प्रतिमा को नदी में विसर्जित किया जाएगा।

बंगाली समाज के प्रतिनिधि मनोज चक्रवर्ती ने बताया कि दीपावली पर मां काली की पूजा का बंगाली संस्कृति में विशेष महत्व है। बंगाली समाज मां काली को ‘बड़ी मां’ के रूप में पूजता है और जहां मां दुर्गा की स्थापना होती है, वहीं मां काली की भी स्थापना की जाती है।



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