बहादुरा के लड्डू और गुलाब जामुन; ग्वालियर में 100 साल पुरानी दुकान, स्वाद के अटलजी थे मुरीद, जानें क्यों खास

बहादुरा के लड्डू और गुलाब जामुन; ग्वालियर में 100 साल पुरानी दुकान, स्वाद के अटलजी थे मुरीद, जानें क्यों खास


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Gwalior Bahadura Ladoo Sweet: बहादुरा के लड्डू और गुलाब जामुन ग्वालियार में बेहद मशहूर हैं. यहां रोज मिठाई बनती है और रोज खत्म हो जाती है. इस दुकान का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी गहरा नाता था. इस दिवाली भी हर बार की तरह यहां लंबी लाइन लगी है. जानें इस मिठाई की खासियत…

रिपोर्ट: सुशील कौशिक

Gwalior News: चंबल अंचल में मिठाई का जिक्र होते ही लोगों की जुबान पर बहादुरा लड्डू का नाम आ जाता है. यह दुकान न सिर्फ अपने शुद्ध स्वाद के लिए मशहूर है, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की पसंदीदा मिठाई की वजह से भी विशेष पहचान रखती है. 100 साल से ज्यादा पुरानी यह दुकान ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है, जहां हर दिन ताजा लड्डू और गुलाब जामुन तैयार किए जाते हैं. दिवाली पर तो यहां मिठाई लेने के लिए कतार लगती है.

बहादुरा स्वीट्स की शुरुआत 1920 के दशक में हुई थी, जब इसके संस्थापक ने शुद्ध देसी घी से बने बूंदी के लड्डू बनाना शुरू किया. आज भी यहां की मिठाइयां पूरी तरह शुद्ध सामग्री से तैयार होती हैं, जिसमें कोई मिलावट नहीं होती. दुकान के मालिक बताते हैं कि लड्डू बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक है, बेसन को घी में भूनकर, चाशनी में मिलाकर और फिर हाथों से गोल आकार देकर तैयार किया जाता है. इसी तरह गुलाब जामुन भी नरम और रसीले होते हैं, जो लोगों को बार-बार यहां खींच लाते हैं.

हमेशा रहती है डिमांड
खास बात ये कि अटल बिहारी वाजपेई अक्सर यहां आकर लड्डू और गुलाब जामुन का स्वाद चखते थे. उनके निधन के बाद भी यह दुकान उनकी यादों का प्रतीक बनी हुई है. स्थानीय निवासी कहते हैं, “अटल जी के लिए यह जगह स्पेशल थी और हमारे लिए भी यह सिर्फ मिठाई की दुकान नहीं, बल्कि भावनाओं का केंद्र है.” शुभ अवसरों जैसे शादी, जन्मदिन या त्योहारों पर लोग बहादुरा के लड्डू से ही मुंह मीठा करना पसंद करते हैं. बड़े आयोजनों में तो हजारों किलो लड्डू की डिमांड रहती है.

इतनी है कीमत
दिवाली के मौके पर बहादुरा स्वीट्स पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. लोग दूर-दूर से आकर लड्डू खरीद रहे हैं. लड्डू और गुलाब जामुन की कीमत 600 रुपये किलो है. दुकान के कर्मचारी बताते हैं कि त्योहार के दौरान उत्पादन दोगुना कर दिया जाता है, ताकि कोई ग्राहक निराश न लौटें.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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