पुलिस की गिरफ्त में खड़े आरोपी.
भोपाल (Bhopal) में नकली नोटों (Fake Currency) का कारोबार करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को पुलिस (Police) ने गिरफ्तार किया है. उनके पास से हजारों के नकली नोट बरामद किया. आरोपी नकली नोट से शराब (Alcohol) खरीदते थे.
- News18Hindi
- Last Updated:
September 17, 2020, 4:07 PM IST
ऐसे हुआ गिरोह का पर्दाफाश
मुकेश और संजय से पूछताछ में संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस को पता चला कि आरोपियों का एक पूरा गिरोह है, जो नकली नोट बनाकर बाजार में सप्लाई कर रहा है. इस पर कोहेफिजा की पुलिस टीम ने प्रभात चौराहे से आरोपी हबीब को गिरफ्तार किया. पुलिस पूछताछ में हबीब ने बताया कि दो महीने पहले उसके परिचित खालिद कुरैशी ने तबरेज नामक व्यक्ति से मिलवाया था. आरोपी हबीब को प्रभात चौराहे पर ही खालिद कुरैशी और तबरेज ने एक लाख नकली नोट दिये थे, जिसमें से हबीब द्वारा 32 हजार-के असली नोट के बदले 66 हजार रुपये के नकली नोट पूर्व मे गिरफ्तार अपने साथी संजय सिंह बुंदेला को दे दिये थे. आरोपी तबरेज ने जहांगीराबाद स्थित अपने मकान पर अंकित अहिरवार उर्फ केतन, आयुष पियाणी और संदीप शाक्या की मदद से मशीन से नकली नोट छापना बताया.
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आरोपी हबीब के खुलासे के आधार पर आरोपी अंकित अहिरवार उर्फ केतन, आयुष पियाणी और संदीप शाक्या को हिरासत मे लेकर पूछताछ की गई. तीनों आरोपियों ने तबरेज के मकान में कलर फोटो कापी मशीन से नकली नोट छापकर आरोपी हबीब को देने के लिए बताया. साथ ही कुछ नोटों को बाजार में चलाने के लिए कहा. आरोपियो के कब्जे से कलर फोटो कापी मशीन, कटर, स्केच पैन और 100-100 के लगभग 13 हजार रुपये नकली नोट बरामद हुये हैं. आरोपी खालिद कुरैशी थाना ऐशबाग के अपराधिक प्रकरण मे केंद्रीय जेल भोपाल मे बंद है. आरोपी तबरेज खान की तलाश की जा रही है.
आरोपी अंकित पहले भी हो चुका गिरफ्तार
आरोपी अंकित अहिरवार पूर्व में भी वर्ष 2018 में थाना ऐशबाग में नकली नोट बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है. फरार आरोपी तबरेज खान के विरूद्ध थाना जहांगीराबाद में जुआं, सट्टा के अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं. आरोपी अंकित, तबरेज एक ही मोहल्ले में रहते हैं. इन आरोपियों ने एक गिरोह तैयार कर बड़ी मात्रा में नकली नोट तैयार किये गये थे. आरोपी संजय सिंह बुंदेला के पकड़े जाने के बाद आरोपियों द्वारा नकली नोट तैयार करना बंद कर दिया गया था. आरोपी हबीब पर दबाव बनाया गया कि वह पुलिस में पकड़े जाने पर अन्य आरोपियों की जानकारी पुलिस को ना दे.