धीरेंद्र शास्त्री बोले- जीत भीड़ से नहीं भगवान से: जन्मस्थली की सत्यनारायण कथा में इंद्रेश उपाध्याय और द ग्रेट खली पहुंचे – khajuraho News

धीरेंद्र शास्त्री बोले- जीत भीड़ से नहीं भगवान से:  जन्मस्थली की सत्यनारायण कथा में इंद्रेश उपाध्याय और द ग्रेट खली पहुंचे – khajuraho News


धीरेंद्र शास्त्री की मां के हाथ खाना खाने पहुंचे इंद्रेश महाराज।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जन्मस्थली में इन 3 दिवसीय संगीतमय श्री सत्यनारायण कथा का आयोजन किया जा रहा है। स्वयं पीठाधीश्वर पं.धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने मुखारविंद से कथा का श्रवण करा रहे हैं। देश में यह संभवतः पहला मौ

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महाभारत का दिया उदाहरण: जीत भीड़ के साथ नहीं

कथा के दूसरे दिन धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि जीत भीड़ के साथ नहीं, बल्कि भगवान के साथ होती है।” उन्होंने महाभारत युद्ध के प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि,”महाभारत युद्ध में भीड़ कौरवों के साथ थी,लेकिन भगवान स्वयं पांडवों के साथ थे।यही कारण था कि पांडवों की विजय हुई।”

मंगल आरती के साथ शुरू हुई दूसरे दिन की कथा में बद्रीनाथ धाम से पधारे पूज्य बालक योगेश्वर दास महाराज की सन्निधि प्राप्त हुई,वहीं श्री धाम वृंदावन के प्रख्यात कथा व्यास पूज्य इंद्रेश महाराज की भी गरिमामय उपस्थिति रही।

सत्यनारायण भागवान की कथा का श्रवण कराते धीरेंद्र शास्त्री।

जन्मभूमि की झोपड़ी से कथा

इस बार धीरेंद्र शास्त्री अपनी जन्मभूमि की उसी झोपड़ी में श्री सत्यनारायण भगवान की कथा सुना रहे हैं, जहां उनका बचपन बीता था। लगभग 20×12 आकार की इस छोटी सी झोपड़ी और पास ही के उसी मैदान में उन्होंने अपना बचपन खेलते-कूदते बिताया था। लगभग एक दशक से अधिक समय बाद वह पुनः इसी जन्मस्थल पर कथा कर रहे हैं। जगह कम होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सीमित है।

थाली में साथ खाया खाना

इंद्रेश और बद्रीनाथ वाले महाराज ने महाराज जी ने धीरेंद्र शास्त्री की माता और चाची के हाथों से बनी कड़ी पुड़ी एक ही थाली में खाई। इस मौके पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इन्देश जी की शादी में बागेश्वर बाबा की माता जी जाएगी, बनना के गीत गाने के लिए। इंद्रेश उपाध्याय ने उस झोपड़ी के दर्शन किए जिसमें गुरु जी का जन्म और बचपन बीता। इस दौरान मंत्री लखन पटेल ने महराज की से कथा के प्रारम्भ में आशीर्वाद प्राप्त किया।

एक थाली में साथ खाना खाते धीरेंद्र शास्त्री और इंद्रेश महाराज।

एक थाली में साथ खाना खाते धीरेंद्र शास्त्री और इंद्रेश महाराज।

शास्त्री बोले- ‘सत्य ही ईश्वर है’

धीरेंद्र शास्त्री ने कथा क्रम में सत्य की महत्ता बताते हुए कहा कि सत्य ही ईश्वर है, इसीलिए इसे सत्यनारायण कहा जाता है। उन्होंने रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव स्वयं माता पार्वती से कहते हैं कि भगवान का भजन ही सत्य है, बाकी यह जगत मिथ्या है।

अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि वह समय बड़े आनंद का था, जब सुबह उठकर धाम पहुँचना, हैंडपंप पर स्नान करना और खूब पूजा-पाठ कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन करना एक नियम था। लेकिन अब व्यस्तता इतनी बढ़ गई है कि नियम करना कठिन हो गया है।

वृंदावन के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित इंद्रेश उपाध्याय धीरेंद्र शास्त्री से मिलने पहुंचे।

वृंदावन के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित इंद्रेश उपाध्याय धीरेंद्र शास्त्री से मिलने पहुंचे।

इंद्रेश उपाध्याय बोले- “जो सहता है, वही जीतता है”

श्री धाम वृंदावन के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित इंद्रेश उपाध्याय भी बागेश्वर धाम पहुंचे। उन्होंने बालाजी और भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया, फिर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री से भेंट की और उनकी माताजी के हाथ का बना प्रसाद ग्रहण किया।

इंद्रेश महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा”जो सहता है, वही जीतता है।” उन्होंने कहा कि इस छोटी सी कुटिया से निकलकर पूरी दुनिया में सनातन का परचम लहराने वाले धीरेंद्र शास्त्री ने अपने जीवन में तमाम बाधाएं सही हैं। उन्होंने कहा कि देश और प्रकृति में बदलाव लाने वाले लोग ऐसे ही स्थानों से निकलते हैं।

शनिवार का दिन वैसे भी बागेश्वर धाम में प्रेतराज दरबार के कारण भीड़ से भरा रहता है, लेकिन इस दिन प्रख्यात कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय और जाने-माने फाइटर द ग्रेट खली के पहुंचने से भीड़ और बढ़ गई। द ग्रेट खली ने बालाजी का आशीर्वाद लिया और धीरेंद्र शास्त्री का आशीर्वाद लेने के साथ फोटो भी खिंचवाई।

द ग्रेट खली के बराबर में खड़े होकर फोटो लेते धीरेंद्र शास्त्री।

द ग्रेट खली के बराबर में खड़े होकर फोटो लेते धीरेंद्र शास्त्री।

द ग्रेट खली ने की पदयात्रा में शामिल होने की अपील

द ग्रेट खली ने सभी सनातनी प्रेमियों से अपील की कि वे धीरेंद्र शास्त्री की 7 नवंबर से 16 नवंबर तक दिल्ली से वृंदावन जाने वाली सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में शामिल हों। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री जिन संकल्पों को लेकर यह यात्रा निकाल रहे हैं, वे संकल्प हम सबके हैं, इसलिए सभी को सहयोग करना चाहिए।



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