मंदिर का चबूतरा, सामुदायिक भवन और बस स्टॉप ‘चोरी’: निवाड़ी विधायक ने अपनी निधि से बनाना बताया, भास्कर की पड़ताल में मौके पर कुछ नहीं – Madhya Pradesh News

मंदिर का चबूतरा, सामुदायिक भवन और बस स्टॉप ‘चोरी’:  निवाड़ी विधायक ने अपनी निधि से बनाना बताया, भास्कर की पड़ताल में मौके पर कुछ नहीं – Madhya Pradesh News


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निवाड़ी जिले की नगर परिषद तरीचर कला में स्थित बड़ी माता के मंदिर में पूजा कर रहीं महिलाओं की आवाज में नेताओं के लिए गुस्सा और निराशा साफ झलकती है। वे उस अधूरे काम की ओर इशारा कर रही थीं, जो कभी पूरा हुआ ही नहीं। इस मंदिर के पास एक सामुदायिक भवन के दालान निर्माण के लिए 9 अगस्त 2023 को तत्कालीन विधायक अनिल जैन की निधि से 4 लाख रुपए की राशि जारी की गई थी।

महीनों बीत जाने के बाद भी मौके पर खोदे गए गड्‌ढों के अलावा कुछ भी नहीं है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी दस्तावेजों में यह काम पूरा हो चुका है। यह कोई अकेला मामला नहीं है। निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में 2019 से 2023 के बीच विधायक निधि से लगभग 300 काम स्वीकृत हुए, लेकिन इनमें से कई या तो मौके पर मौजूद ही नहीं हैं, या फिर आधे-अधूरे हैं।

दैनिक भास्कर ने जब इन दावों की सच्चाई जानने के लिए निवाड़ी पहुंचकर जमीनी पड़ताल की, तो भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग की एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो चौंकाने वाली है। हमारी जांच में कई ऐसे काम मिले जिनके नाम पर लाखों की राशि तो निकाली गई, लेकिन जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। पढ़िए रिपोर्ट….

12 साल में मिली 16 करोड़ विधायक निधि निवाड़ी विधायक अनिल जैन 2013 में पहली बार विधायक बने थे। उस समय एक विधायक को विधायक निधि के तौर पर 1 करोड़ रुपए और स्वेच्छानुदान राशि 50 लाख रुपए मिलती थी। साल 2022 के बाद विधायक निधि 2.5 करोड़ और स्वेच्छानुदान 75 लाख रु. हो गई। इस हिसाब से देखा जाए तो 2013 से 2025 तक अनिल जैन को विधायक निधि के तौर पर 16.5 करोड़ रुपए मिले हैं। साथ ही स्वेच्छानुदान के तौर इन 12 सालों में 6 करोड़ 50 लाख रु. मिले हैं।

आरटीआई में जवाब मिला 11 करोड़ के काम कराए सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद केवट ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी कि 2013 से 2025 तक विधायक अनिल जैन ने विधायक निधि से कितने करोड़ के विकास काम कराए थे और कितनी स्वेच्छानुदान राशि खर्च की। इसका जवाब दिया गया कि विधायक ने इस दौरान 11 करोड़ से ज्यादा के विकास काम कराए। इनमें विधायक ने कई जगहों पर यात्री प्रतीक्षालय, मंदिरों में चबूतरे और सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया है।

भास्कर की मौके पर की गई पड़ताल….

नगर परिषद अध्यक्ष बोले- पैसा विधायक जी के पास सुरक्षित हैं

भास्कर की टीम सबसे पहले नगर परिषद तरीचर कला में स्थित बड़ी माता के मंदिर पहुंची। कागजों के मुताबिक यहां विधायक निधि से मंदिर में एक दालान बनाया गया है। यहां जब पहुंचे तो देखा कि दालान का दूर दूर तक कोई नामो-निशान नहीं था। मंदिर में बैठीं महिलाओं से बात की, तो उन्होंने कहा कि ऐसा सुनने में आया था, लेकिन मौके पर कुछ नहीं है।

बड़ी माता मंदिर में अधूरे पड़े दालान के बारे में जब हमने नगर परिषद अध्यक्ष रोहित सूत्रकार से बात की, तो उन्होंने एक हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यहां दालान बनना था, रुपए भी स्वीकृत हो गए थे, लेकिन 4 लाख में काम पूरा नहीं हो पा रहा था। विधायक जी ने 8 लाख रुपए की घोषणा की थी और परिषद से भी सहयोग मिलना था, कुल 10 लाख की लागत से काम होना था।

जब उनसे पूछा गया कि स्वीकृत 4 लाख रुपए का क्या हुआ, तो उन्होंने बड़ी सहजता से कहा, ‘वह राशि सुरक्षित है, विधायक जी के पास।’ रोहित का ये जवाब अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। पहला, अगर काम शुरू ही नहीं हुआ तो उसे कागजों में पूरा क्यों दिखाया गया? और दूसरा, विधायक निधि की राशि विधायक के पास ‘सुरक्षित’ कैसे रह सकती है? यह सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।

तरीचर कला में स्थित बड़ी माता के मंदिर जहां कागजों में चबूतरा बन चुका है, लेकिन मौके पर कुछ नहीं है।

तरीचर कला में स्थित बड़ी माता के मंदिर जहां कागजों में चबूतरा बन चुका है, लेकिन मौके पर कुछ नहीं है।

3 लाख का यात्री प्रतीक्षालय, मौके पर कचराघर हमारी पड़ताल का अगला पड़ाव था निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र का टेहरका गांव। यहां जिखनगांव अस्तारी मार्ग पर इमली के पेड़ के पास तिराहे पर साल 2019 में यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण होना बताया गया है। इस स्टील स्ट्रक्चर वाले प्री-फैब्रिकेटेड यात्री प्रतीक्षालय के निर्माण के लिए विधायक निधि से तीन लाख 6 हजार 327 रुपए की राशि जारी हुई थी।

गांव वालों को उम्मीद थी कि अब उन्हें धूप और बारिश में बस का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और तिराहे की सूरत भी बदल जाएगी, जो सालों से कचराघर बना हुआ था, लेकिन उनकी उम्मीदें कभी पूरी नहीं हुईं। आज भी वह तिराहा वैसा का वैसा ही है, कचरे और गंदगी से भरा हुआ। प्रतीक्षालय के नाम पर वहां एक कील तक नहीं ठोकी गई।

तिराहे पर चाय की दुकान चलाने वाले बुजुर्ग भंवर प्रसाद बताते हैं, ‘यहां सालों से ऐसा ही कचराघर है। कभी कुछ नहीं बदला।सरकारी फाइलों में यह प्रतीक्षालय बन चुका है और इसका भुगतान भी हो चुका है, लेकिन हकीकत में यह पैसा किसकी जेब में गया, यह एक बड़ा सवाल है।

चारदीवारी के नाम पर सिर्फ एक दीवार निवाड़ी के रामगढ़ सुरारा में गोंड बाबा मंदिर के पास एक सामुदायिक भवन की बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) के निर्माण के लिए 2018 में विधायक निधि से 2 लाख रुपए स्वीकृत हुए। जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो वहां न तो कोई सामुदायिक भवन मिला और न ही कोई चारदीवारी। मंदिर चारों ओर से खुला हुआ था। पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया, “यहां कोई सामुदायिक भवन नहीं है।

यह एक कमरा है जिसे हम लोगों ने चंदा करके बनवाया है, जिसमें मंदिर का सामान रखा रहता है। इसके बगल में जो एक दीवार दिख रही है, वह एक निजी घर की है, जिसे पीडब्ल्यूडी ने बनवाया था। शायद उसी 50 फीट की दीवार को बाउंड्री वॉल दिखाकर पैसे निकाल लिए गए। हमारा मंदिर तो आज भी खुले में है।”

यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है, जहां एक निजी दीवार को सरकारी प्रोजेक्ट बताकर लाखों रुपए हड़प लिए गए।

गोंड बाबा के मंदिर के चारों तरफ कागजों में विधायक निधि से बाउंड्री वॉल बनी है, लेकिन मौके पर ये नजर नहीं आती।

गोंड बाबा के मंदिर के चारों तरफ कागजों में विधायक निधि से बाउंड्री वॉल बनी है, लेकिन मौके पर ये नजर नहीं आती।

विधायक स्वेच्छानुदान में भी गोलमाल… तीन केस विधायक निधि के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार तो एक पहलू है, लेकिन इससे भी गंभीर मामला विधायक स्वेच्छानुदान राशि के वितरण में सामने आया। यह राशि अत्यंत गरीब, बीमार और जरूरतमंद लोगों की तत्काल सहायता के लिए होती है। लेकिन निवाड़ी में इस निधि को विधायक अनिल जैन ने अपने ड्राइवर, भाजपा के मंडल अध्यक्ष, सरकारी नौकरी में लाखों का वेतन पाने वालों और अपने चहेतों में रेवड़ी की तरह बांटा।

1.75 वर्षीय बुजुर्ग को ‘पढ़ाई’ के लिए दिए 5000 रुपए स्वेच्छानुदान के दुरुपयोग का एक और हास्यास्पद मामला निवाड़ी के बरईपुरा निवासी 75 वर्षीय दयाराम चौरसिया का है। सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 1966 में पढ़ाई छोड़ दी थी। वे वर्षों से घर पर ही रहते हैं, लेकिन ऐसे बुजुर्ग को भी स्वेच्छानुदान से ‘पढ़ाई’ के नाम पर 5000 रुपए की सहायता दे दी गई। यह मामला बताता है कि निधि बांटते समय किसी भी नियम या विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया, बस अपने चहेतों के नाम पर पैसा निकाला गया।

2. मंडल अध्यक्ष और ड्राइवर के परिवार पर बरसी कृपा निवाड़ी के भाजपा मंडल अध्यक्ष कमलेश चौरसिया और उनके परिवार पर स्वेच्छानुदान की विशेष कृपा रही। उन्हें और उनकी पत्नी फूलवती चौरसिया को अलग-अलग समय पर कुल 5 बार बीमारी सहायता के नाम पर राशि दी गई। इसी तरह, विधायक के ड्राइवर रज्जन खान के परिवार को 6 साल में 6 बार सहायता राशि मिली।

रज्जन की मां जुलेखा खातून, पिता वली मोहम्मद और बहन परवीन को बार-बार इलाज के नाम पर 5000-5000 रुपए दिए गए। एक ही दिन में परिवार को 10,000 रुपए तक की सहायता दी गई। यह स्पष्ट रूप से भाई-भतीजावाद और अपने लोगों को उपकृत करने का मामला है।

3.शिक्षक दंपत्ति के बेटे को दो बार बीमारी सहायता, जो घूमता है विदेश निवाड़ी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-दो में पदस्थ उच्चतर माध्यमिक शिक्षक देवेंद्र वर्मा और उनकी पत्नी, जो स्वयं भी एक सरकारी शिक्षक हैं, का मासिक वेतन 1.5 लाख रुपए से अधिक है। इसके बावजूद उनके बेटे अमन वर्मा को 4 साल में दो बार बीमारी सहायता के नाम पर विधायक स्वेच्छानुदान से राशि दी गई।

जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, अमन वर्मा को 2 सितंबर 2019 को 5,000 रुपए और 24 जनवरी 2022 को फिर से 5,000 रुपए की सहायता दी गई। जब हमने अमन वर्मा के सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल की, तो वह लग्जरी होटलों में पार्टी करते, महंगी गाड़ियों में घूमते और विदेश यात्रा करते नजर आए। उनकी नेपाल यात्रा की तस्वीरें भी मौजूद हैं।

यह साफ तौर पर दिखाता है कि एक संपन्न परिवार को गरीबों के हक का पैसा दिया गया, जबकि सैकड़ों जरूरतमंद लोग सहायता के लिए भटकते रहते हैं।

अमन वर्मा को 4 साल में दो बार विधायक ने बीमारी के लिए 10 हजार रु. स्वेच्छानुदान राशि दी है।

अमन वर्मा को 4 साल में दो बार विधायक ने बीमारी के लिए 10 हजार रु. स्वेच्छानुदान राशि दी है।

70 प्रतिशत काम हुए ही नहीं, CBI तक की है शिकायत

इस पूरे मामले को आरटीआई के जरिए सामने लाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद केवट बताते हैं, ‘हमें लगातार विधायक निधि के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थीं। जब हमने आरटीआई से जानकारी निकाली तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। पिछले 10 वर्षों में जो 300 काम कागजों पर दिखाए गए हैं, उनमें से करीब 70 प्रतिशत जमीन पर हुए ही नहीं हैं।

हमारे हिसाब से करीब 3 करोड़ 80 लाख रु. के काम अधूरे हैं। इसी तरह 2013 से 2025 तक स्वेच्छानुदान के तौर पर विधायक को 6 करोड़ 50 लाख रु. मिले हैं। इनमें से 8.32 लाख रुपए बिना रिकॉर्ड के बांट दिए हैं। निवाड़ी के जिला पंचायत उपाध्यक्ष गयादीन अहिरवार भी इन आरोपों की पुष्टि करते हैं।

वे कहते हैं, ‘योजना एवं सांख्यिकी विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार विधायक निधि का उपयोग धार्मिक कार्यों में नहीं किया जा सकता, लेकिन यहां 90 प्रतिशत निधि मंदिरों के पास दालान और दीवार बनाने जैसे कामों में खर्च की गई। और तो और, इन कामों में भी भारी कमीशनखोरी हुई है।

विधायक बोले, शिकायत है तो दिखा लेंगे विधायक निधि से लेकर भास्कर ने निवाड़ी विधायक अनिल जैन से बात की तो उन्होंने कहा कि, मैने जो भी काम कराए हैं, वे जमीन पर भी है, स्थान को लेकर भ्रम की स्थिति हो सकती है। इसी तरह अपात्रों को स्वेच्छानुदान देने पर उन्होंने कहा कि हमारे पास कोई मदद मांगने आता है तो देते हैं, उसका बैकग्राउंड देखते हैं कि जरूरतमंद है या नहीं। ये पैसा सरकारी नौकरी वाले को नहीं दिया जाता।

यदि कोई बीमार है वो अपने इलाज के मदद मांगने आता है तो उसे ये राशि दी जाती है। उनसे पूछा कि आरोप है कि आपने 8.32 लाख रुपए बिना जांच पड़ताल के ही बांट दिए, तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, जिसे भी ये राशि दी जाती है उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। ड्राइवर और उसके परिवार को कई बार स्वेच्छानुदान राशि देने के सवाल पर विधायक चुप्पी साध गए।



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