खंडवा में देसी गन का असर! रात में डरकर उठ रहे बच्चे, धमाका सुन सहम रहे हैं

खंडवा में देसी गन का असर! रात में डरकर उठ रहे बच्चे, धमाका सुन सहम रहे हैं


खंडवा. दीवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है लेकिन इस बार मध्य प्रदेश के खंडवा सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र में बच्चों की दीवाली डर और पछतावे के साथ बीती. वजह बनी बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाली देसी गन, जिसने मासूमों की आंखों और कानों को नुकसान पहुंचाया. यह गन 100 से 150 रुपये में बेची जा रही थीं और हैरानी की बात तो यह है कि इन्हें घर पर भी केवल 60 रुपये की लागत में तैयार किया जा सकता था. दिखने में भले ही यह खिलौना जैसी लगती हों लेकिन इनके इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट गंभीर हैं. तेज आवाज, बारूद का धुआं और अचानक फटना, ये सब बच्चों के लिए किसी खतरे से कम नहीं था.

दीवाली से करीब 15 दिन पहले खंडवा शहर के चौक-चौराहों और गलियों में देसी बंदूकें बिकनी शुरू हो गई थीं. बाहर से आए कुछ व्यापारी सस्ते दामों में इन्हें बेच रहे थे. बच्चे उत्साहित थे. धमाका करने वाली यह नई चीज उन्हें पटाखों से भी ज्यादा रोमांचक लगी लेकिन परिवारों को नहीं पता था कि यह खुशी जल्द ही मुसीबत में बदल जाएगी. खंडवा के एक निवासी ने बताया कि उनके बच्चे ने बहुत जिद की, तो हमने भी सोचा कि खेलने की चीज है, देसी गन ले ली. पहले दो दिन तक सब ठीक था लेकिन तीसरे दिन जैसे ही उसने बंदूक चलाई, आंखों में जलन होने लगी. बाद में पता चला कि बंदूक के बारूद के धुएं से एलर्जी हो गई है.

जहरीला धुआं छोड़ता बारूद
पिछले दिनों खंडवा से कइयों माता-पिता अपने बच्चों को इंदौर, जलगांव और निजी क्लीनिक में लेकर पहुंचे, जिन्हें आंखों में जलन, कानों में दर्द या सुनने में तकलीफ की शिकायत हुई. डॉक्टरों के अनुसार, इन देसी बंदूकों में इस्तेमाल होने वाला बारूद बेहद निम्न गुणवत्ता का होता है, जो जलने पर जहरीला धुआं छोड़ता है. विशेषज्ञ डॉ अनमोल पाटिल लोकल 18 को बताते हैं कि ऐसे खिलौनों में इस्तेमाल होने वाला केमिकल आंखों और त्वचा के लिए बेहद हानिकारक होता है. छोटे बच्चों की आंखें संवेदनशील होती हैं, जिससे संक्रमण या जलन तेजी से बढ़ सकती है. लगातार तेज धमाके बच्चों के कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

बच्चों पर मानसिक असर
इन मामलों से बच्चों पर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक असर भी देखने को मिल रहा है. कई अभिभावकों ने बताया कि अब धमाके की आवाज से उनके बच्चे घबरा जाते हैं. कुछ तो रात में डरकर उठ जाते हैं या खेलने से भी कतराने लगे हैं. खंडवा के एक स्कूल टीचर ने बताया कि कुछ बच्चों ने स्कूल में भी बताया कि दीवाली पर बंदूक चलाने के बाद उनके कानों में आवाज गूंजती रहती है. अब वे पटाखों से भी डरने लगे हैं.

सस्ती चीज ने किया बड़ा नुकसान
100 से 150 रुपये में मिलने वाली यह बंदूक लोगों को मस्ती का सस्ता विकल्प लगी लेकिन परिणाम गंभीर साबित हुए. बाजार में इन्हें खुलेआम बेचा जा रहा था, वो भी किसी सरकारी जांच या लाइसेंस के बिना. नगर प्रशासन ने अब इनपर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका है. नगर निगम अधिकारी का कहना है कि ऐसे खिलौने जिनमें विस्फोटक या बारूद का प्रयोग होता है, उनकी बिक्री कानूनन प्रतिबंधित है. जल्द ही ऐसे सामान बेचने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.

माता-पिता को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अभिभावक बच्चों को ऐसी चीजें खरीदने से पहले सावधानी बरतें. किसी भी खिलौने पर ISI मार्क या सुरक्षा प्रमाणन अवश्य देखें. बच्चों को समझाएं कि असली धमाका पटाखों का नहीं बल्कि मुस्कान और सुरक्षित खेल का होता है. यदि किसी भी बच्चे को आंख, कान या त्वचा में जलन जैसी समस्या दिखे, तो फौरन डॉक्टर से सलाह लें.



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