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गया जिले के अति नक्सल प्रभावित इमामगंज प्रखंड क्षेत्र के कोठी के रहने वाले शोएब खान का चयन युएई के नेशनल टीम में हुआ है. हाल ही में शोएब ने युएई के डेवलपमेंट लीग ILT-20 में बढ़िया प्रदर्शन किया था.
बिहार के एक छोटे से गांव के शोएब खान अब दुनिया के अलग-अलग देश में लंबे-लंबे छक्के लगाते दिखेंगे. जी हां, गया जिले के अति नक्सल प्रभावित इमामगंज प्रखंड क्षेत्र के कोठी के रहने वाले शोएब खान का चयन युएई के नेशनल टीम में हुआ है. हाल ही में शोएब युएई के डेवलपमेंट लीग ILT-20 में भी इन्होंने बढ़िया प्रदर्शन किया था और उसी का इनाम इन्हें मिला और अब युएई के लिए खेलेंगे.

नक्सल क्षेत्र के छोटे गांव के शोएब खान की संघर्ष और हिम्मत की कहानी भी प्रेरणादायक है. जहां शिक्षा और खेल की बेहतर सुविधाएं नहीं थी, वहां बच्चे अपने सपने संजोते थे. शोएब के माता-पिता भी शुरुआत में उन्हें खेल से दूर रखने के पक्ष में थे क्योंकि उन्हें खेल में करियर बनाने का विश्वास नहीं था. लेकिन शोएब ने हिम्मत नहीं हारी. धीरे-धीरे उन्होंने जिला और विश्वविद्यालय स्तर की क्रिकेट टीमों में जगह बनाई.

बचपन से ही शोएब को क्रिकेट का शौक था लेकिन गांव में उस तरह की सुविधा नहीं थी. इनके पिता जो पेशे से किसान हैं उन्होने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में कोई कसर नही छोडी. खुद बीए एलएलबी की पढ़ाई की है और सभी बच्चों को भी अच्छी शिक्षा दी. उन दिनों गांव में अच्छे स्कूल नहीं थे तो उन्होंने शोएब को गया शहर में स्थित ज्ञान भारती स्कूल में एडमिशन करा दिया. शोएब ने यहीं से क्रिकेट खेलना शुरु किया. यहां वह टेनिस बाॅल से प्रैक्टिस करते थे.

शोएब के बडे भाई अल्तमस खान जो गया जिले में ही संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत जिला आपदा प्रबंधन में एचआरवीसीए के पद पर सेवा दे रहे हैं लोकल 18 से बातचीत में बताया कि शोएब खान ने स्कूल स्तर पर क्रिकेट खेलने के बाद जिला और राज्य स्तर के टूर्नामेंट में भी भाग लिया. इसी बीच उनका नामांकन जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय, दिल्ली में हो गया, जहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट भी जारी रखा. अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर शोएब विश्वविद्यालय टीम में चयनित हुए और देश के कई बड़े खिलाड़ियों के साथ चैरिटी मैच और विश्वविद्यालय डेवलपमेंट टूर्नामेंट में हिस्सा लिया.

बिहार रणजी टीम में जगह न मिलने के बाद शोएब मायूस होकर क्रिकेट छोड़ने तक का सोच रहा था. देश के लिए खेलने का सपना था, लेकिन यहां भी रणजी टीम में खेलने का मौका नहीं मिला. दुबई में क्रिकेट खेलने की वैकेंसी की खबर मिलते ही शोएब ने वहां जाने की तैयारी शुरू कर दी. पिता ने उसकी पूरी मदद की और महीनों तक घर से पैसे भेजते रहे. धीरे-धीरे उसने दुबई और शारजाह के कई क्लबों में खेलना शुरू किया और एक प्रोफेशनल क्रिकेटर के रूप में पहचान बनानी शुरू की.

शोएब की मेहनत रंग लाई और अब इनका चयन युएई के राष्ट्रीय टीम में हुआ है और मंगलवार को ही उन्होंने यूएसए के खिलाफ डेब्यू मैच खेला था और 29 गेंद में 28 रन बनाकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गये थे. इससे पहले शोएब खान को दुबई के स्थानीय क्रिकेट में उनके बेहतरीन फील्डिंग कौशल के लिए इमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. पिछले साल उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच और बेस्ट फील्डर टूर्नामेंट का अवार्ड भी मिला था.