मध्य प्रदेश से ज़्यादा मौतें वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश (797), पंजाब (734), बिहार (589), झारखंड (515), हरियाणा (320) और राजस्थान (165) शामिल हैं. एनएचआरसी ने राज्य सरकारों से संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने और राहत उपायों को लागू करने का भी आग्रह किया.
एनएचआरसी का आदेश
एनएचआरसी ने राज्य सरकारों से भी आग्रह किया कि वे संवेदनशील वर्गों, विशेष रूप से नवजात शिशुओं, बच्चों, शिशुओं, गरीबों, बुजुर्गों, बेघरों, निराश्रितों और आश्रय और संसाधनों की कमी के कारण जोखिम में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाएं और राहत उपाय लागू करें. एनएचआरसी ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें देश में 2019 से 2023 के बीच शीत लहरों के कारण 3,639 मौतें हुई हैं.
राज्यों को भेजे अपने पत्र में, एनएचआरसी ने 23 अक्टूबर को शीत लहरों के प्रभावों को कम करने के लिए एनडीएमए (National Disaster Management Authority) के दिशानिर्देशों को बताया. इसमें इलाज, दिन और रात के रहने का, मेडिकल देखभाल करना और सर्दी से संबंधित बीमारियों के लिए सही उपचार लागू करना, राहत प्रयासों की लगातार निगरानी करना और एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना शामिल है.
अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी
आयोग ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील बनाने का आग्रह किया है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और संवेदनशील आबादी को शीत लहर से बचाने के लिए अपनाए गए उपायों पर अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्रन ने कहा किला नीना वर्ष के कारण इस साल सर्दियां अधिक कठोर होने की संभावना है. मध्य प्रदेश में शीत लहरें दिसंबर और जनवरी के दौरान देखी जाती हैं.
उन्होंने कहा कि शीत लहरों के दौरान, खासतौर से सर्दियों के सीधे संपर्क से बचना चाहिए, चूंकि सर्दियों में प्रदूषण का लेवल भी बढ़ जाता है, इसलिए सांस से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए.