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Shafali Verma inspirational story: शेफाली वर्मा में वर्ल्ड कप फाइनल में कमाल कर दिया. 21 साल इस होनहार खिलाड़ी ने बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया. शेफाली ने बल्लेबाजी में 87 रन की पारी खेली. इसके बाद गेंदबाजी में उन्होंने दो विकेट लिए. शेफाली ऐसे ही खरा सोना नहीं बनी हैं.उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की है. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने इस खिलाड़ी पर भरोसा जताया और शेफाली कप्तान के भरोसे पर खरा उतरीं.
नई दिल्ली. शेफाली वर्मा बैटिंग ही नहीं बॉलिंग में भी तुरुप का इक्का साबित हुईं. आईसीसी महिला विश्व कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शेफाली ने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से पूरी महफिल लूट ली.उन्होंने बल्लेबाजी में ओपनिंग करते हुए शानदार 87 रन की पारी खेली जिसकी बदौलत भारत ने 298 का स्कोर खड़ा किया. इसके बाद जब गेंदबाजी में भारत को विकेट की जरूरत हुई तब शेफाली ने अपनी स्पिन गेंदबाजी से दो जल्दी जल्दी विकेट निकालकर टीम इंडिया का पलड़ा भारी कर दिया.शेफाली यूं ही खरा सोना नहीं बनी हैं. शुरुआती दिनों में लड़कों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करने वाली शेफाली ट्रेनिंग की भट्ठी में पूरी तरह पक चुकी हैं. पिता संजीव वर्मा ने बिटिया के सपने को पूरा करने के लिए दिन रात एक कर दिए.
शेफाली वर्मा (Shafali Verma) ने पहले ओपनिंग में 78 गेंदों पर 87 रन की पारी खेली जिसमें 7 चौके और दो छक्के शामिल थे. उन्होंने स्मृति मंधाना के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी कर भारत को धमाकेदार शुरुआत दिलाई. इसके बाद शेफाली ने गेंदबाजी में अपनी स्पिन बॉलिंग से सभी को हैरान कर दिया. शेफाली को हरमनप्रीत ने पारी के 21वें ओवर में गेंदबाजी के लिए बुलाया जो शेफाली का इस मैच में पहला ओवर था. शेफाली ने इस ओवर की दूसरी ही गेंद पर सुने लुस को अपनी ही गेंद पर कैच आउट कर भारत को बड़ी सफलता दिलाई.लुस 31 मैचों में 25 रन बनाकर आउट हुईं.
शेफाली वर्मा ने बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में भी किया कमाल.
हरमन की उम्मीदों पर खरा उतरीं शेफाली
इसके बाद शेफाली को 23वें ओवर में गेंदबाजी के लिए बुलाया गया. शेफाली ने इस ओवर की पहली ही गेंद पर मरिजाने कैप को ऋचा घोष के हाथों कैच कराकर अपना दूसरा शिकार किया.कैप 5 गेंदों पर चार रन बनाकर आउट हुईं. शेफाली इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार गेंदबाजी नहीं करती हैं. लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्हें लगातार गेंदबाजी करते हुए देखा जा सकता है. इसी का फायदा उन्हें फाइनल मैच में मिला. शेफाली ने अहम समय पर विकेट लेकर भारत की मैच में वापसी कराई.
रोहतक में प्रैक्टिस की सुविधाएं नहीं थीं
28 जनवरी, 2004 को हरियाणा के रोहतक में जन्मी शेफाली वर्मा को यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा. रोहतक की सुनार गली में सराफा का काम करने वाले संजीव वर्मा खुद एक अच्छे क्रिकेटर रहे. लेकिन टीम इंडिया के लिए खेलने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका. इसलिए उन्होंने बेटी के जरिए अपने सपने को जीने का मन बनाया. रोहतक में शेफाली को क्रिकेट की प्रैक्टिस के लिए अच्छी सुविधाएं नहीं थी. वह लड़कों के साथ खूब प्रैक्टिस करती थीं.
शेफाली के नाम हुआ विश्व रिकॉर्ड.
लड़कों संग प्रैक्टिस की खातिर पिता ने शेफाली के बाल बॉयकट कराया
पिता संजीव ने अपनी बिटिया को लड़कों के साथ खिलाने के लिए शेफाली के बाल को बॉयकट कराया. शेफाली अभी भी बॉयकट बाल में क्रिकेट खेल रही हैं. संजीव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्होंने शेफाली को सचिन तेंदुलकर की बैटिंग स्टाइल को दिखाया तो शेफाली ने क्रिकेट के भगवान को अपना आइडल मानकर प्रैक्टिस का तरीका सुधारा.
करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से… और पढ़ें