खंडवा और देवास में बनेगा ओंकारेश्वर अभ्यारण्य… बना नया टूरिस्ट हब, रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

खंडवा और देवास में बनेगा ओंकारेश्वर अभ्यारण्य… बना नया टूरिस्ट हब, रोजगार को मिलेगा बढ़ावा


Omkareshwar Sanctuary: मध्य प्रदेश को एक और प्राकृतिक सौगात मिली है. प्रदेश के खंडवा और देवास जिलों में फैले घने जंगलों को मिलाकर “ओंकारेश्वर अभयारण्य” के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह अभयारण्य न केवल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण भी बनेगा. यह मध्य प्रदेश का 27वां अभयारण्य होगा. मुख्यमंत्री ने बताया कि ओंकारेश्वर अभयारण्य का निर्माण प्रदेश की प्राकृतिक संपदा की रक्षा और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

611 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा अभयारण्य
खंडवा और देवास जिले के कुल 611 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को मिलाकर यह अभयारण्य बनाया जाएगा. इनमें खंडवा का लगभग 350 वर्ग किलोमीटर और देवास का करीब 260 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल होगा. इस पूरे इलाके में पहले से ही घने वन, जलस्रोत, पहाड़ियां और जैव विविधता मौजूद है. खास बात यह है कि इस क्षेत्र में कोई आबादी नहीं बसती, जिससे लोगों के विस्थापन का सवाल नहीं उठेगा.

खीवनी अभयारण्य से जुड़ने वाला कॉरिडोर बनेगा
ओंकारेश्वर अभयारण्य को देवास जिले के खीवनी अभयारण्य से जोड़ने के लिए एक विशेष कॉरिडोर बनाया जाएगा. खीवनी में पहले से ही 11 टाइगर मौजूद हैं. यह कॉरिडोर बाघों और अन्य जंगली प्राणियों के लिए सुरक्षित आवाजाही का मार्ग बनेगा, जिससे उनकी आबादी और सुरक्षा दोनों में वृद्धि होगी.

जंगल में बसे हैं अनोखे जीव-जंतु
ओंकारेश्वर क्षेत्र के जंगलों में पहले से ही टाइगर, भालू, लेपर्ड, हायना, नीलगाय, हिरण और सांभर जैसे कई जंगली जीव पाए जाते हैं. यह इलाका न केवल वन्यजीवों का सुरक्षित घर है बल्कि यहां की वनस्पति और पक्षियों की विविधता भी अद्भुत है. इंदिरा सागर बांध के बैकवॉटर में बसे लगभग 50 छोटे-बड़े टापू इस जगह को एक सुंदर प्राकृतिक गहना बना देते हैं.

विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
खंडवा जिले के डीएफओ राकेश कुमार डामोर के अनुसार, अभयारण्य के लिए जरूरी मूलभूत ढांचे का निर्माण तेजी से चल रहा है. स्टाफ के लिए आवास, चेकपोस्ट, वॉच टावर और पेट्रोलिंग कैंप तैयार किए जा चुके हैं. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है ताकि यहां के वन्यजीवों को किसी प्रकार का खतरा न हो और पर्यटकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके.

पर्यटन और रोजगार की अपार संभावनाएं
ओंकारेश्वर खुद धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से प्रसिद्ध स्थान है. अब अभयारण्य बनने से यह क्षेत्र प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन दोनों का केंद्र बन जाएगा. यहां आने वाले पर्यटक जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, नेचर कैंप और टापू भ्रमण जैसे अनुभवों का आनंद उठा सकेंगे. इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइडिंग, होटल, ट्रैवल, हैंडीक्राफ्ट और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं खुलेंगी.

प्रकृति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम
ओंकारेश्वर अभयारण्य केवल जंगल और वन्यजीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्र नर्मदा तट की आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जुड़ा है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण मिलकर इसे एक ऐसा गंतव्य बनाएंगे, जहां पर्यटक प्रकृति, शांति और रोमांच तीनों का अनुभव कर सकेंगे. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर अभयारण्य मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है. यह हमारे वन्यजीवों की रक्षा करेगा और प्रदेश की आर्थिक और पर्यावरणीय समृद्धि में नई दिशा देगा.

इस तरह ओंकारेश्वर अभयारण्य न केवल एक वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र बनेगा, बल्कि यह मध्य प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर का प्रतीक बनकर उभरेगा. आने वाले समय में यह स्थान प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर स्वर्ण अक्षरों में अपनी पहचान दर्ज कराएगा.



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