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Isabgol Cultivation: नवंबर का महीना ईसबगोल की खेती शुरू करने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जा रहा है. किसान अब पारंपरिक फसलों की जगह औषधीय फसलों की ओर रुख कर रहे हैं जिनमें ईसबगोल सबसे आगे है. इसकी बाजार में लगातार बढ़ती मांग के कारण किसान औषधीय खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं और नई तकनीकों को भी अपना रहे हैं.
सतना में नवंबर का महीना ईसबगोल की खेती के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. किसान इस औषधीय फसल को अपनाकर लाखों रुपए की आमदनी कर सकते हैं. ठंडी और शुष्क जलवायु में पनपने वाली यह रबी फसल किसानों के लिए लाभ का सुनहरा अवसर बनकर उभर रही है.

ईसबगोल की खेती से एक बार की मेहनत में ही किसानों को भारी मुनाफा मिलता है. इसकी फसल केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी मांग में है. यही कारण है कि अब सतना और आसपास के किसान इस फसल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.

कृषि विशेषज्ञ विष्णु तिवारी ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि ईसबगोल की बुवाई नवंबर के दूसरे या तीसरे हफ़्ते तक कर लेनी चाहिए. दिसंबर में देर से बुवाई करने पर उत्पादन में भारी गिरावट आती है. समय पर बुआई से पौधों की वृद्धि और उपज दोनों बेहतर होती है.

ईसबगोल एक सन सेंसिटिव यानी धूप से प्रभावित होने वाला पौधा है. अगर दिन की अवधि बढ़ जाती है तो यह पौधा समय से पहले पक जाता है जिससे बीजों की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसलिए बुवाई के समय जलवायु और प्रकाश अवधि का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ईसबगोल की अच्छी फसल के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है. इस मिट्टी में जीवाश्म पदार्थों की पर्याप्त मात्रा और जल निकास की सही व्यवस्था होनी चाहिए ताकि पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके.

मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन ईसबगोल की वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है. यदि मिट्टी में जैविक खाद और नमी बनी रहे तो पौधे बेहतर विकसित होते हैं. यही कारण है कि किसान गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग बढ़ा रहे हैं.

उद्यानिकी विभाग की अधिकारी मीनाक्षी वर्मा ने बताया कि ईसबगोल एक प्राकृतिक फाइबर युक्त पौधा है जिसका उपयोग कई आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है. यह कब्ज, एसिडिटी, गैस और अपच जैसी समस्याओं में बेहद प्रभावी माना जाता है.

ईसबगोल में मौजूद घुलनशील फाइबर शरीर से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल निकालने में मदद करता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और वजन घटाने में भी सहायक है. पानी या दूध के साथ इसका सेवन पाचन क्रिया को मजबूत करता है और पेट को साफ रखता है.