वेयरहाउस मूंग की उपज की तुलाई करते मजदूर।
नरसिंहपुर जिले के किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेची गई मूंग और उड़द का भुगतान न मिलने के विरोध में शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। केंद्र सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम 2025 के तहत खरीदी गई इन फसलों के ऑफलाइन
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यह याचिका किसान सुंदरलाल, आशाबाई और दिलीप कुमार की ओर से दायर की गई है। इसमें राज्य शासन, कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, नरसिंहपुर कलेक्टर, कृषि विकास विभाग के उप संचालक और सहकारिता विभाग के उप आयुक्त को प्रतिवादी बनाया गया है।
नहीं किए ई-बिल जनरेट
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता किसानों ने गर्मी की फसल के दौरान अपनी मूंग और उड़द की उपज सरकार को एमएसपी पर बेची थी। किसानों ने विधिवत स्लॉट बुक कर उपार्जन केंद्रों पर अनाज बेचा था और कृषि उपार्जन संस्था द्वारा उपज की रसीदें भी जारी की गई थीं।
हालांकि, इन रसीदों के बावजूद अब तक न तो ई-बिल जनरेट किए गए हैं और न ही किसानों को उनकी उपज का भुगतान मिला है। यह स्थिति किसानों के लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन रही है।
इस संबंध में, सहकारिता विभाग के उप आयुक्त ने 18 अगस्त 2025 को कृषि विभाग के उप संचालक को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में नरसिंहपुर जिले की बी-पैक्स समितियों द्वारा ऑफलाइन मूंग और उड़द की खरीदी स्वीकार की गई थी। पत्र में समितिवार और किसानवार सूची भेजकर ई-बिल तैयार करने और किसानों को भुगतान की अनुमति मांगी गई थी। यह दर्शाता है कि प्रशासन को इस समस्या की जानकारी थी।
गोदाम में मूंग की उपज तोलते मजदूर।
भीड़ और सर्वर समस्या के कारण बिल नहीं बनें
कलेक्टर नरसिंहपुर ने 21 अगस्त 2025 को कृषि विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर 294 किसानों के ई-बिल बनाने हेतु ई-उपार्जन पोर्टल की तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था। कलेक्टर ने स्वीकार किया कि भीड़ और सर्वर समस्या के कारण अंतिम तिथि निकल जाने से ऑनलाइन बिल नहीं बन सके थे।
किसानों ने बताया कि उन्होंने 7 अक्टूबर 2025 को भी संबंधित विभाग को लिखित प्रतिवेदन देकर भुगतान की मांग की थी। हालांकि, तीन महीने बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
याचिका में कहा गया है कि विभागीय लापरवाही के कारण किसानों को गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने हाईकोर्ट से मांग की है कि सरकार को निर्देशित किया जाए कि किसानों की खरीदी गई उपज के ई-बिल तत्काल तैयार कर भुगतान ब्याज सहित किया जाए, ताकि उन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य मिल सके।