तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ADDICON-2025’ का शुक्रवार को इंदौर में समापन हुआ। देश-विदेश से आए मनोचिकित्सकों, नशा विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने नशा एवं तकनीकी लत की बढ़ती समस्या पर गंभीर चर्चा की। इसे रोकने के लिए ठोस सामा
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समापन समारोह में उपस्थित सभी विशेषज्ञों, डॉक्टरों और संगठनों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि भारत सरकार को नशा-नियंत्रण और पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाने के लिए लिखित में सुझाव और आवेदन भेजे जाएंगे।
विशेष रूप से यह निर्णय लिया गया कि देशभर के पुनर्वास केंद्रों, चिकित्सा संस्थानों और सामाजिक संगठनों को जोड़कर “नशामुक्त भारत अभियान” को और प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
‘नशा रिश्तों में झूठ, बेईमानी और अविश्वास को जन्म देता है’
सम्मेलन के अंतिम सत्र में डॉ. टीएस राव ने “रिलेशनशिप्स पर नशे का प्रभाव” विषय पर अपने शोध प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि नशे की आदत व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक नियंत्रण को नष्ट कर देती है। इस कारण वैवाहिक संबंधों में दूरी, अविश्वास और एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर जैसी स्थितियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति के व्यक्तिगत और वैवाहिक जीवन पर गहरा असर डालती है।
नशे के प्रभाव में व्यक्ति धीरे-धीरे अपने जीवनसाथी से शारीरिक और भावनात्मक दूरी बनाने लगता है, जिससे संबंधों की नींव कमजोर पड़ जाती है। यह खालीपन कई बार उसे वैकल्पिक संबंधों या एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स की ओर धकेल देता है।
उन्होंने कहा कि नशे की आदत रिश्तों में झूठ, बेईमानी और अविश्वास को जन्म देती है, जिससे परस्पर भरोसा टूटता है और वैवाहिक तनाव बढ़ता है। आज कुटुंब न्यायालयों में तलाक के बढ़ते मामलों में नशे की लत एक प्रमुख कारण के रूप में उभर रही है, जो केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है।
नशामुक्त भारत की दिशा में ठोस नीति निर्माण का लक्ष्य
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राम गुलाम राजदान ने कहा कि डिकॉन का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक कर नशामुक्त भारत की दिशा में ठोस नीति निर्माण में योगदान देना है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां, एक स्वस्थ और संतुलित वातावरण में जीवन जी सकें। यह “पर्यावरण अनुकूल सम्मेलन” के रूप में आयोजित किया गया। इसमें कागज के कम से कम उपयोग, डिजिटल सूचना-साझा करण और हरित पहल के माध्यम से आयोजकों ने सतत विकास का उदाहरण प्रस्तुत किया।