पर्यावरण संरक्षण को जीवन का उद्देश्य बनाने वाले झाबुआ के शिक्षक राजकुमार देवल के कार्यों पर आधारित स्मरण पत्र ‘कृतित्व’ का विमोचन शुक्रवार को शारदा विद्या मंदिर में किया गया। यह पुस्तक देवल की पर्यावरण यात्रा और वृक्ष संवर्धन के कार्यों को समर्पित है
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विमोचन कार्यक्रम में इतिहासकार डॉ. के.के. त्रिवेदी, पेंशनर एसोसिएशन के ललित त्रिवेदी, समाजसेवी मनोज शर्मा, मातृशक्ति की किरण शर्मा, समाजसेवी नीरज राठौर और अधिवक्ता उमंग सक्सेना सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी ने राजकुमार देवल के पर्यावरण संरक्षण में किए गए योगदान की सराहना की और ‘कृतित्व’ पुस्तक को प्रेरणादायक बताया।
वृक्ष संवर्धन की मिसाल बने देवल
आयोजकों ने बताया कि एक शिक्षक होने के बावजूद राजकुमार देवल ने अपने जीवन का ध्येय हरियाली और वृक्ष संरक्षण को बनाया। वर्ष 2010 में उन्होंने गोपाल मंदिर परिसर में आंवला, बिल्व, अमलतास और नीम जैसे पौधों से शुरुआत की थी। आज वही पौधे विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं।
देवल सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहे, वे खुद गड्ढे खोदते, पानी की व्यवस्था करते और चार साल तक पौधों की नियमित देखरेख करते रहे। इस कार्य में उन्हें मनोज शर्मा, राजेंद्र शर्मा, प्रकाश मिश्रा और राकेश त्रिवेदी जैसे साथियों का पूरा सहयोग मिला। पानी की कमी होने पर टैंकरों से सिंचाई की गई और जगह-जगह टैंक भी बनाए गए।

शहर में 1500 से अधिक पौधे लगाए
पिछले 15 वर्षों में राजकुमार देवल ने झाबुआ शहर में 1500 से अधिक पौधे लगाए हैं। किशनपुरी कॉलोनी में वर्ष 2019 में लगाए गए 111 पौधे आज हरे-भरे वृक्ष बन चुके हैं। यहां दीपक धूमरे, देवानंद बैरागी और भगवान दास बैरागी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सामाजिक महासंघ के नीरज राठौर हर साल हजारों पौधे निशुल्क वितरित करते हैं। उन्होंने भी देवल के इस अभियान में सहयोग दिया।
प्रेरणा का स्रोत बनेगा ‘कृतित्व’
विमोचन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि ‘कृतित्व’ सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण की जीवंत कहानी है। यह स्मरण पत्र लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने और हरियाली बढ़ाने की दिशा में प्रेरित करेगा। झाबुआ में राजकुमार देवल को अब “हरियाली के प्रहरी” के रूप में जाना जा रहा है। उनकी यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।